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    ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार की नई राह, डीडीयू-जीकेवाई से 1,268 से अधिक को नौकरी

    गांधीनगर। गुजरात के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित ‘दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (DDU-GKY) प्रभावी परिणाम दे रही है। न्यूनतम 10,000 रुपये प्रति माह वेतन सुनिश्चित करने वाली इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 मार्च, 2026 तक 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 1,268 से अधिक युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक नियोजित किया गया है, जिसमें महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है।

    बाजार की मांग के अनुसार 40 से अधिक क्षेत्रों में नि:शुल्क प्रशिक्षण

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा ग्रामीण विकास मंत्री कुंवरजीभाई बावळिया और राज्य मंत्री संजयसिंह महिडा के नेतृत्व में इस योजना का क्रियान्वयन गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड (GLPC) द्वारा किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत 40 से अधिक 'सेक्टर स्किल काउंसिल' (SSC) से मान्यता प्राप्त ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, रिटेल, सोलर टेक्नोलॉजी, बीपीओ, वेब डिजाइनिंग और इलेक्ट्रिशियन जैसे आधुनिक उद्योग आधारित पाठ्यक्रम शामिल हैं।

    आवासीय सुविधा, यात्रा भत्ता और शिक्षण सामग्री पूरी तरह मुफ्त

    प्रशिक्षणार्थियों के लिए यह योजना पूरी तरह नि:शुल्क है। आवासीय (रेजिडेंशियल) प्रशिक्षार्थियों के लिए भोजन और आवास की मुफ्त व्यवस्था की गई है, जबकि गैर-आवासीय प्रशिक्षार्थियों को प्रत्येक 15 दिन में यात्रा भत्ता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त सभी अभ्यर्थियों को यूनिफॉर्म, टैबलेट, पहचान पत्र और पाठ्य सामग्री बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती है। योजना के चयन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग अभ्यर्थियों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।

    नियुक्ति के बाद 12 महीने तक तकनीकी सहयोग और मेंटरिंग

    इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता यह है कि यह केवल रोजगार दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को कार्यस्थल पर स्थिरता प्रदान करने के लिए नौकरी मिलने के बाद भी आगामी 12 महीनों तक निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन, परामर्श और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में दक्षता से स्थापित हो सकें।

    सफलता की मिसाल: दक्षा डामोर की आत्मनिर्भरता की कहानी

    महीसागर जिले के काकरिया गांव की निवासी दक्षा डामोर के लिए यह योजना बदलाव का माध्यम बनी। पांच भाई-बहनों के परिवार में आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहीं दक्षाबेन ने योजना के अंतर्गत नि:शुल्क आवासीय प्रशिक्षण के साथ 'रिटेल सेल्स एग्जीक्यूटिव', कंप्यूटर-आईटी और सॉफ्ट स्किल्स की कुशलता हासिल की। पूर्व में संवाद में झिझक महसूस करने वाली दक्षाबेन अब हिंदी और अंग्रेजी में आत्मविश्वास के साथ संवाद करती हैं और एक स्वावलंबी जीवन व्यतीत कर रही हैं।

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