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    भारत की नई हवाई ताकत का सफल टेस्ट, IAF ने खगांतक-243 ग्लाइड बम को आजमाया

    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) खगांतक-243 का सफल ड्रॉप टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण वायुसेना की दूर से ही अचूक और सटीक निशाना लगाने की क्षमता को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

    मारक क्षमता और वॉरहेड

    300 किलोग्राम वजनी इस ग्लाइड बम में 125 किलोग्राम का MK-81 वॉरहेड लगाया गया है। खगांतक-243 की मारक क्षमता लगभग 144 से 180 किलोमीटर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस नेटवर्क की सीमा में घुसे बिना काफी दूर से ही उसके ठिकानों को तबाह कर सकते हैं। भविष्य में इसे मिग-29K और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों में तैनात करने की योजना है।

    निर्माण और परीक्षण

    इसे नागपुर की स्टार्टअप कंपनी जेएसआर डायनेमिक्स (JSR Dynamics) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। पोखरण में सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान के जरिए इसका पहला सफल परीक्षण किया गया था। शुरुआती परीक्षणों की सफलता को देखते हुए वायुसेना ने BEL को इसके सीमित उत्पादन का ऑर्डर भी जारी कर दिया है।

    ग्लाइड तकनीक की विशेषताएं

    सामान्य क्रूज मिसाइलों के विपरीत ग्लाइड बम में कोई इंजन नहीं होता है। विमान से ड्रॉप होने के बाद यह अपने एयरोडायनामिक डिजाइन और लिफ्ट के बल पर लक्ष्य की ओर ग्लाइड करते हुए आगे बढ़ता है। इंजन न होने की वजह से यह बेहद किफायती होता है और इसे कम लागत में बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है।

    भविष्य के अन्य वेरिएंट्स

    खगांतक श्रृंखला में 306 और 225 जैसे अधिक पेलोड व अधिक दूरी तक मार करने वाले भारी वेरिएंट्स भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 1,000 किलोग्राम वजनी 'गौरव' लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का भी सफल परीक्षण किया था। खगांतक-243 के आने से भारतीय वायुसेना का स्वदेशी स्टैंड-ऑफ हथियारों का भंडार और अधिक मजबूत होगा।

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