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    IPS अफसरों के प्रमोशन की तैयारी, राज्य के 3 अधिकारियों को बनाया जाएगा DG

    रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) से पुलिस महानिदेशक (DG) या स्पेशल डीजी के पद पर पदोन्नत करने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार के समक्ष 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति हेतु तीन नए एक्स-कैडर डीजी पद निर्मित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। हालांकि, इन एक्स-कैडर पदों की स्थापना के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति प्राप्त होना अभी शेष है।

    कैबिनेट मंजूरी और केंद्रीय स्वीकृति की आवश्यकता

    गृह विभाग व पुलिस मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, तीन एक्स-कैडर डीजी पदों के सृजन हेतु तैयार प्रस्ताव को जल्द ही राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के समक्ष स्वीकृति के लिए रखा जा सकता है। नियमानुसार, कैडर सीमा से अधिक एक्स-कैडर पदों के निर्माण के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होती है।

    इन तीन अधिकारियों को मिल सकती है पदोन्नति

    यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो निम्नलिखित अधिकारियों को डीजी या स्पेशल डीजी के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है:

    • एसआरपी कल्लूरी (Siva Rama Prasad Kalluri): 1994 बैच

    • प्रदीप गुप्ता (IPS Pradeep Gupta): 1995 बैच

    • विवेकानंद (IPS Vivekanand): 1996 बैच

    वर्तमान में राज्य में स्वीकृत कैडर के अनुसार डीजी के दो पद (डीजीपी अरुण देव गौतम और डीजी प्रशिक्षण जीपी सिंह) तथा एक्स-कैडर डीजी के दो पद (डीजी होमगार्ड पवन देव और डीजी जेल हिमांशु गुप्ता) पहले से ही क्रियाशील हैं।

    पूर्व में भी चर्चा में रहा है एक्स-कैडर पदों का मामला

    उल्लेखनीय है कि मई 2025 में हुई आईपीएस कैडर समीक्षा में केवल दो एक्स-कैडर पदों की ही अनुमति दी गई थी। ऐसे में तीन अतिरिक्त डीजी पदों के सृजन की प्रशासनिक आवश्यकता और औचित्य को लेकर तकनीकी सवाल भी उठ रहे हैं।

    राज्य में पूर्व में भी कैडर सीमा से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के समायोजन हेतु एक्स-कैडर पद सृजित किए जाते रहे हैं। वर्ष 2018 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा बिना केंद्रीय गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति के तीन एक्स-कैडर डीजी पद मंजूर किए गए थे, जिसे बाद में उच्च न्यायालय द्वारा नियमों के उल्लंघन के आधार पर निरस्त कर दिया गया था। नियमतः कैडर संरचना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन हेतु केंद्र सरकार की पूर्व सहमति अनिवार्य होती है।

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