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    स्मृति ईरानी राज्यसभा क्यों नहीं गईं? अमेठी हार के बाद पहली बार बताई पूरी बात

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हाल ही में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। इस अहम फैसले के साथ ही वे एक बार फिर देश की सियासत के केंद्र में आ गई हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी उन्हें राज्यसभा के जरिए संसद भेजेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब राज्यसभा न भेजे जाने और संगठन में अपनी भूमिका को लेकर स्मृति ईरानी ने बेहद खुलकर अपनी बात रखी है।

    एक विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी में किसी पद को व्यक्ति की पहचान नहीं माना जाता, बल्कि इसे केवल संगठन की सेवा करने का एक जरिया समझा जाता है।

    संघर्ष के दिन और संगठन की सीख

    • अमेठी की राजनीतिक चुनौती: उन्होंने कहा कि यदि उनके लिए केवल राजनीतिक पद मायने रखता, तो वे कभी अमेठी जैसी कठिन सीट से चुनाव लड़ने का साहस न दिखातीं। वर्ष 2019 में उन्होंने राहुल गांधी को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, हालांकि 2024 में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।

    • 2003 के शुरुआती दिन: महाराष्ट्र बीजेपी युवा मोर्चा के अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस वक्त देवेंद्र फडणवीस भी उनके सहकर्मी थे। तब किसी ने नहीं सोचा था कि दोनों भविष्य में इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को संभालेंगे।

    • कार्यकर्ताओं का सहयोग: उन्होंने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि वे अपने साथियों की मदद के लिए घर से पेट्रोल और पानी का खर्च लेकर निकलती थीं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें हमेशा यही सिखाया कि जरूरतमंद कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना ही असली संगठन है।

    'पद से बड़ा है संगठन के प्रति समर्पण'

    • निष्ठा ही असली ताकत: पूर्व केंद्रीय मंत्री के अनुसार, राजनीति में दायित्व मिलना सम्मान की बात है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चीज संगठन के प्रति आपकी प्रतिबद्धता होती है।

    • पीएम मोदी की सराहना: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई तारीफ को अपने पूरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया।

    • राज्यसभा पर रुख: राज्यसभा न जाने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता होना और संगठन के लिए जमीनी काम करना किसी भी संवैधानिक पद से कहीं ज्यादा मायने रखता है।

    स्मृति ईरानी के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में पार्टी संगठन को मजबूत करने में पूरी ताकत झोंकने वाली हैं।

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