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    SRCC के पूर्व छात्रों की कामयाबी के कायल हुए PM मोदी, जमकर की तारीफ

    नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कॉलेज के समृद्ध इतिहास और इसके पूर्व छात्रों के वैश्विक योगदान की जमकर सराहना की। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि SRCC के पूर्व छात्र भले ही खुद को ‘धुरंधर’ कहें या न कहें, लेकिन उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी की धूम जरूर मचाई है।

    '2013 के भाषण की लहर और असर आज भी कायम'

    प्रधानमंत्री ने वर्ष 2013 में इसी मंच से दिए गए अपने बहुचर्चित भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से उस संबोधन की काफी चर्चा हो रही है। लोगों ने उसे दोबारा सुना और पढ़ा है। उन्होंने कहा कि उस समय उस भाषण ने एक नई लहर पैदा कर दी थी और आज 13-14 साल बाद भी उस सभा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और अरुण जेटली की यादों का जिक्र

    पीएम मोदी ने SRCC के पूर्व छात्रों को युवा भाषा में ‘OGs’ (ओरिजिनल दिग्गज) करार दिया।

    • दिवंगत नेता अरुण जेटली का स्मरण: पीएम ने पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली को याद करते हुए कहा कि उनके साथ ऐसी कोई मुलाकात नहीं होती थी, जिसमें वे अपने कॉलेज के दिनों का किस्सा न सुनाते हों।

    • हर क्षेत्र में पहचान: पीएम ने बताया कि उनकी कोर टीम का हिस्सा संजीव सान्याल भी यहीं से पढ़े हैं। SRCC ने केवल अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि कलाकार, राजनीतिज्ञ, प्रख्यात वकील और न्यायाधीश भी देश को दिए हैं।

    वैश्विक चुनौतियों के बीच 7.8% की मजबूत जीडीपी विकास दर

    देश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। हाल ही में आए आंकड़ों में 7.8 प्रतिशत की तिमाही विकास दर ने देश के सामूहिक आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। यह उपलब्धि तब हासिल हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में तमाम अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

    विरोधियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि देश न केवल प्रगति कर रहा है बल्कि बड़े पैमाने पर नए अवसर भी पैदा कर रहा है। इसके बावजूद, जिन लोगों के लिए 2013 में गिलास आधा खाली था, उनके लिए वह आज भी आधा खाली ही रहेगा।

     

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