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    स्मृति ईरानी ने क्यों कहा- ‘मेरे बाप के गिरेबान तक कोई हाथ पहुंचा है तो ये मेरी गलती’?

    नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने आत्मीय व राजनीतिक संबंधों को साझा करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पिता तुल्य बताते हुए कहा कि वे उनके पिता की उम्र के हैं और यदि कोई उन तक या उनके मान-सम्मान तक पहुंचता है, तो वे इसे अपनी व्यक्तिगत विफलता और भूल मानती हैं। इस साक्षात्कार में उन्होंने पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच, कड़े फैसलों और कार्यशैली की जमकर सराहना की।

    सरदार सरोवर बांध का उदाहरण देकर बताई पीएम मोदी की निर्णय क्षमता

    प्रधानमंत्री मोदी के समर्पण और त्वरित निर्णय क्षमता को रेखांकित करने के लिए स्मृति ईरानी ने गुजरात के ऐतिहासिक सरदार सरोवर बांध परियोजना का दृष्टांत दिया।

    • इतिहास की कड़ियां: उन्होंने याद दिलाया कि 1946 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने जिस बांध की कल्पना की थी और 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जिसका शिलान्यास किया, वह 1980 के दशक तक अधूरा पड़ा रहा। 1995 में कानूनी अड़चनों के चलते काम पर रोक लग गई थी।

    • मुख्यमंत्री के रूप में संघर्ष: 2006-07 के दौर में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने सीमा पर बीएसएफ जवानों की पेयजल समस्या को समझा और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने का आग्रह किया, जिसकी अनुमति नहीं मिली।

    • 2014 का ऐतिहासिक फैसला: 2014 में प्रधानमंत्री पद की कमान संभालते ही नरेंद्र मोदी ने महज 17 दिनों के भीतर बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने की मंजूरी दी, जिससे लगभग 4 करोड़ नागरिकों तक पीने का पानी पहुंचा।

    संसद की कार्यवाही और राजनीतिक वापसी पर स्पष्ट रुख

    संसद में जारी गतिरोध और बहस के मुद्दे पर उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा था कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तत्पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संसद इसलिए नहीं जा पा रही थीं क्योंकि विपक्षी हंगामे के चलते सदन सुचारू रूप से चल ही नहीं पा रहा था।

    उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से मिली पराजय के बाद उनके राजनीतिक सफर को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, पार्टी ने उन पर पुनः विश्वास जताते हुए हाल ही में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है।

     

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