चुनावी दौरे पर अलवर आ रहे मुख्यमंत्री से धार्मिक-सामाजिक संगठनों की मांग, बोले- हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं
अलवर। राजस्थान में नीलगाय संरक्षण और नीलगाय हत्या से जुड़े कानून को लेकर एक बार फिर आवाज उठने लगी है। राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन टीम ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मार्मिक अपील करते हुए नीलगाय हत्या जैसे कानून को वापस लेने की घोषणा करने की मांग की है। टीम का कहना है कि जीव हत्या किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती और सरकार को अहिंसा, दया, करुणा तथा मानवता के मूल्यों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
चुनाव प्रचार के सिलसिले में मुख्यमंत्री के अलवर आने के मद्देनजर आंदोलन से जुड़े अनेक धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने यह मांग उठाई है। संगठनों का कहना है कि नीलगाय सहित वन्यजीवों की रक्षा केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह जीवों के प्रति संवेदना और समाज में अहिंसा की भावना से भी जुड़ा हुआ है।
किसानों की समस्या का समाधान हत्या नहीं
राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन टीम के प्रमुख ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में नीलगायों से जुड़ी समस्या को लेकर किसानों की चिंताओं को समझना जरूरी है, लेकिन किसी जीव की हत्या को समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का किसान स्वयं नीलगाय हत्या कानून के विरोध में है तो सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि किसानों की फसल और आजीविका की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक एवं अहिंसक उपाय तलाशे जाने चाहिए, ताकि किसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।
गुप्ता ने कहा कि आंदोलन से जुड़े करीब 25 संगठनों की ओर से पूर्व में भी मुख्यमंत्री को कई ज्ञापन रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक इस मांग पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। ऐसे में निकाय चुनाव के माहौल के बीच मुख्यमंत्री से एक बार फिर सार्वजनिक रूप से इस कानून को वापस लेने की घोषणा करने की अपील की जा रही है।
25 संगठनों ने पहले भी भेजे ज्ञापन
आंदोलन से जुड़े संगठनों के अनुसार नीलगाय संरक्षण और कथित नीलगाय हत्या कानून के विरोध में करीब 25 संगठनों ने पहले भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे हैं। इन संगठनों में धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग शामिल हैं।
आंदोलन टीम का कहना है कि नीलगाय को लेकर किसानों की समस्याओं का समाधान संवाद और वैज्ञानिक व्यवस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार किसानों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के साथ चर्चा कर प्रभावी नीति तैयार कर सकती है।
संगठनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस विषय को केवल राजनीतिक या चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि जीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और किसान हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में निर्णय लिया जाए।
अहिंसा और सनातन मूल्यों का दिया हवाला
ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में अहिंसा, दया, करुणा और जीव मात्र के प्रति संवेदना को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में किसी जीव की हत्या को समस्या के समाधान के तौर पर स्वीकार करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि हिंदू और सनातन परंपरा में जीवों के प्रति करुणा और प्रकृति के संरक्षण की भावना सदियों से रही है। सरकार से आग्रह है कि वह इन मूल्यों को ध्यान में रखते हुए नीलगाय से संबंधित कानून की समीक्षा करे और यदि आवश्यक हो तो उसे वापस लेने की दिशा में कदम उठाए।
चुनावी माहौल में मांग ने पकड़ा जोर
नगर निकाय चुनाव को लेकर अलवर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के चुनाव प्रचार के लिए अलवर आने की संभावना के मद्देनजर नीलगाय रक्षा आंदोलन से जुड़े संगठनों ने अपनी मांग को फिर से प्रमुखता से उठाया है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रखेंगे। उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान नीलगाय संरक्षण, किसान हित और अहिंसा से जुड़े मुद्दे की ओर आकर्षित करना है।
संगठनों ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताई है कि वे उनकी मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए नीलगाय हत्या से जुड़े कानून को वापस लेने की घोषणा करेंगे और किसानों तथा वन्यजीवों के हित में वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने की पहल करेंगे।
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