नई दिल्ली। कांग्रेस हाईकमान ने राज्यों के संगठन प्रभारियों में बड़ा फेरबदल करते हुए प्रत्येक राज्य के लिए अलग सियासी रणनीति और जिम्मेदारियां तय की हैं। पार्टी ने केवल संगठन की 'कुर्सियां' नहीं बदली हैं, बल्कि गुटबाजी सुलझाने से लेकर आगामी विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार करने तक के 'मिशन' सौंपे हैं। पंजाब में सचिन पायलट, गुजरात में रणदीप सुरजेवाला और असम में भूपेश बघेल की नई तैनाती इसी सोच को दर्शाती है।
पंजाब: अंदरूनी गुटबाजी और घर संभालने की चुनौती
सचिन पायलट को पंजाब का प्रभार सौंपना सिर्फ एक चुनावी नियुक्ति नहीं, बल्कि पार्टी को एकजुट रखने का प्रयास है। चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश के अन्य नेताओं के बीच चल रही तनातनी को दूर कर संगठन को एकजुट करना पायलट की पहली प्राथमिकता होगी। राहुल गांधी द्वारा पंजाब के नेताओं से की गई बैठक के तुरंत बाद लिया गया यह फैसला साफ संकेत देता है कि हाईकमान पहले अंदरूनी कलह खत्म करना चाहता है।
गुजरात: 2027 चुनाव के लिए सुरजेवाला पर दांव
कर्नाटक में बिना किसी विवाद के नेतृत्व परिवर्तन कराकर हाईकमान का भरोसा जीतने वाले रणदीप सिंह सुरजेवाला को अब गुजरात की कमान सौंपी गई है। पिछले तीन दशकों से सत्ता से दूर रही कांग्रेस के लिए बीजेपी के इस मजबूत गढ़ में संगठन, सामाजिक समीकरण और नया चुनावी नैरेटिव तैयार करना सुरजेवाला का मुख्य लक्ष्य होगा।
असम: भूपेश बघेल का 'री-डिप्लॉयमेंट'
भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी देना इस फेरबदल का एक अहम बिंदु है। हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री के चुनावी और रणनीतिक अनुभव पर भरोसा बरकरार रखा है। पूर्वोत्तर के इस चुनौतीपूर्ण राज्य में उनकी तैनाती यह स्पष्ट करती है कि पार्टी किसी वरिष्ठ नेता की उपयोगिता केवल एक राज्य के चुनावी नतीजों से तय नहीं कर रही।
महाराष्ट्र: नए चेहरे के साथ संगठन का रीसेट
महाराष्ट्र में डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को प्रभारी बनाकर कांग्रेस ने संगठन को नए सिरे से साधने का संदेश दिया है। यहाँ पार्टी के सामने अपना वोट बैंक मजबूत करने के साथ-साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगी दलों के बीच अपना राजनीतिक प्रभुत्व बनाए रखने की चुनौती होगी।
छत्तीसगढ़: सुखदेव भगत को रिवाइवल की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ में सत्ता से बाहर होने के बाद सुखदेव भगत को संगठन में दोबारा जान फूंकने का काम दिया गया है। कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बिठाना और एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
आंध्र प्रदेश: शून्य से संगठन खड़ा करने की कवायद
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के सामने सबसे बुनियादी चुनौती अपना खोया हुआ आधार वापस पाने की है। नए प्रभारी को स्थानीय स्तर पर नए चेहरे तैयार करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और क्षेत्रीय दलों के प्रभुत्व के बीच पार्टी के अस्तित्व को पुनः स्थापित करने का कठिन लक्ष्य मिला है।


