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    जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त समारोह आयोजित

    जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी को केवल पाठ्यपुस्तकों का ही अध्ययन नहीं कराया जाए, बल्कि उससे इतर जीवन से जुड़ी विवेक जागरूक करने वाली शिक्षा भी दी जाए। इसी से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और वे विवेकवान बन सकेंगे। राज्यपाल श्री बागडे सोमवार को जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के अष्टम दीक्षान्त समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत को बार बार प्रयोग में लाएंगे तो यह भाषा तेजी से आगे बढ़ेगी। उन्होंने संस्कृत को प्राचीनतम भाषा बताते हुए कहा कि यह श्रुति परंपरा से, मौखिक रूप में सुनाते और सुनते जन भाषा बनी। उन्होंने कहा कि भारत के बाहर से आकर भी लोग संस्कृत सीखते थे।

    राज्यपाल ने कहा कि हमारे यहां अगस्त्य ऋषि ने हजारों वर्ष पहले ही संस्कृत के श्लोक में बिजली कैसे बनती है, इसका सिद्धांत प्रतिपादित कर दिया था। उन्होंने भारद्वाज ऋषि द्वारा विमान बनाने की विधा के बारे में बहुत पहले बता दिया था। उन्होंने कहा कि ज्ञान की महान परम्परा से जुड़े नालन्दा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को बख्तियार खिलजी ने जला दिया। पर, ज्ञान को जलाया नहीं जा सकता। लोगों ने अपने मन में सहेजकर इस ज्ञान को अपने पास सहेजे रख आगे बढ़ाया। राज्यपाल ने कहा कि भारत के ज्ञान को पश्चिम द्वारा अपना कहकर बताया जाता रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र के शिवकर बापू तलकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने मुंबई की चौपाटी में अपने बनाए विमान को पंद्रहसौ फिट तक आकाश में उड़ाया था। अंग्रेजों ने उसके इस ज्ञान को दबा दिया। बाद में इसी विधा से राइट बंधु द्वारा पहला विमान उड़ाने का श्रेय मिला। उन्होंने कहा कि भारत को गुलाम रखे जाने के लिए लार्ड मैकाले ने इस तरह की शिक्षा का सूत्रपात किया, जिसमें मानसिक रूप से भारतीय गुलाम रहे। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी शिक्षा पद्धति विकसित की गई, जिसमें पश्चिम को महान बताने के साथ मुगलों की विजय का इतिहास पढ़ाया गया।

    राज्यपाल ने कहा कि संत—महात्माओं का जीवन अपने लिए नहीं, समग्र समाज के हित से जुड़ा होता है। उन्होंने रामानंदाचार्य जी के कहे को स्मरण करते हुए कहा कि "जात पात पूछे नहीं कोई हरि को भजे सो हरि का होई।"  उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रणेता नारायणदासजी महाराज को भविष्य दृष्टा बताते हुए कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय नारायणदासजी महाराज की भविष्य की ज्ञान दृष्टि रहा है।

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने दीक्षान्त भाषण दिया।

    राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की पहल पर स्थापित राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की वेबसाइट का लोकार्पण किया। उन्होंने ब्रह्मर्षि श्री गुरुवानंद स्वामी और प्रो. रमेश कुमार पांडे को विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पीएचडी, सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, उपाधियां प्रदान की। कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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