दुर्जन व अज्ञानी का साथ देने वाले को भी भारी कष्ट उठाना पड़ता है
भीलवाड़ा। जीवन में जिसने भी दुर्जन व अज्ञानी का साथ दिया उसे बहुत कष्ट उठाना पड़ता है। रावण ओर कंस का जिसने साथ दिया उनका भी नाश हो गया। इसी तरह गलती जुबान करती है पर सजा दांतों को मिलती है। जुबान की सार्थकता भजन करने में होती है। जीवन में जिसने स्वाद ओर विवाद को जीत लिया वह दुनिया को जीत लेता है।

ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत सोमवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जुबान को स्वाद पेट भरने पर आता है,भूखे पेट कभी स्वाद याद नहीं आता। घरों में कई बार जुबान थाली पर महाभारत करा देती है। भोजन पाने वाले ओर परोसने वाले मौन रहकर भोजन करे तो घर स्वर्ग बन जाएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि हमारे जीवन में इसी धरती पर स्वर्ग ओर नरक है। पुण्य की जड़ पाताल ओर पाप की जड़ अस्पताल है। जीवन में सुखी हो तो पुण्य का फल ओर दुःखी हो तो पाप का फल मिल रहा है। शास्त्र दपर्ण समान होते है वह वहीं बात कहते जैसी होती है। व्यक्ति के पास विवेक नहीं है तो परमात्मा,गुरू ओर शास्त्र भी क्या करेंगे। आत्मजागरण होने पर ही विवेकवान बना जा सकता है। उन्होंने कहा कि सड़क ओर शिक्षक एक समान होते है। सड़क पर चलने वाला ओर शिक्षक के पास आने वाला मंजिल प्राप्त कर लेता है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म कमजोर हो रहा है तो उसके लिए जिम्मेदार हम है। माता पिता कमाई में लगकर रामद्वारा जैसे धर्म स्थलों पर आना जाना छोड़ रहे है तो बच्चें धर्म से विमुख हो रहे ओर संस्कारों की कमी हो रही है। माता पिता पर बच्चों को संस्कारवान बनाने का दायित्व होता है लेकिन वह ऐसा कर नहीं पा रहे है। बच्चों को संस्कार देने पर ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां भगवान को छप्पन भोग लगाते है ओर पिज्जा व बर्गर भारत के पकवान नहीं है पर हम बच्चों को लाड़ प्यार से ये सड़ा गला आहार करा रहे है। सात्विक आहार करने पर ही सात्विक वृति एवं सात्विक विचार होंगे। जैसा हमारा खानपान होगा वैसा ही हमारा मन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रामस्नेही परम्परा के अनुसार आज एकादशी पर आधा चातुर्मास सानंद सम्पन्न हो रहा है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। संत प्रीतमरामजी सहित कुछ श्रद्धालुओं ने भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। एकादशी होने से दोपहर 3 से 4 बजे तक वितराग महाराज के भजन हुए। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
भागवत भक्ति भगवत प्रवचन महोत्सव 13 सितम्बर से
आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है। इसमें भागवत भक्ति, भक्त व भगवान पर चर्चा एवं जीवन दर्शन पर प्रवचन होंगे। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्धान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे।
इस सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा।
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