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    बीज विधेयक 2025 पर किसान महापंचायत की हुंकार, रामपाल जाट ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजे सुझाव

    किसानों के हित में बीज व्यवस्था सख्त करने की मांग, नकली बीज पर कठोर दंड और पीड़ितों को क्षतिपूर्ति का उठाया मुद्दा

    नई दिल्ली। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर बीज विधेयक 2025 के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने किसानों के हितों और देश की खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बीजों की उपलब्धता, गुणवत्ता, मूल्य और किसानों की क्षतिपूर्ति से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने की मांग की है।

    रामपाल जाट ने अपने पत्र में कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसानों को बीजों की संप्रभुता के अधिकार के अंतर्गत सही समय पर प्रमाणिक बीज न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नकली, निष्फल अथवा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले बीजों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

    नकली और निष्फल बीजों पर कठोर कार्रवाई की मांग

    किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि बीजों से जुड़ी धोखाधड़ी और किसानों को होने वाले नुकसान के मामलों में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। साथ ही पीड़ित किसानों को उचित क्षतिपूर्ति देने की व्यवस्था भी कानून में शामिल होनी चाहिए।

    उन्होंने पत्र में प्रौद्योगिकी के नाम पर किसानों को कथित रूप से नपुंसक अथवा जेनेटिकली मोडिफाइड बीजों के माध्यम से होने वाले आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्थाओं पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।

    उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति की ओर से प्रस्तुत आवेदन पर संबंधित व्यवस्था द्वारा संज्ञान लेने का स्पष्ट प्रावधान कानून में शामिल किया जाए।

    बीजों की बढ़ती कीमतों का दिया उदाहरण

    रामपाल जाट ने अपने पत्र में विभिन्न फसलों के बीजों की कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरसों का पायनियर बीज कथित रूप से 30 हजार रुपये बढ़कर प्रति क्विंटल 1.10 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

    इसी तरह उन्होंने मिर्ची के बीज की कीमत 50 हजार रुपये तथा टिंडा और भिंडी के बीजों की कीमत 90 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे उत्पादक किसानों के आर्थिक शोषण का उदाहरण बताया।

    केंद्रीय और राज्य समितियों में किसानों की भागीदारी की मांग

    किसान महापंचायत ने बीज विधेयक में केंद्रीय एवं राज्य स्तर की समितियों में किसानों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है।

    पत्र में कठोर दंड का प्रावधान करने, पीड़ित किसानों को उचित क्षतिपूर्ति देने और उपशमन से जुड़े प्रावधानों को हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा दोष सिद्ध करने की प्रक्रिया में अभियुक्त पर निर्दोष सिद्ध होने का भार रखने का सुझाव भी दिया गया है।

    रामपाल जाट ने नकली और निष्फल बीजों की स्पष्ट कानूनी परिभाषा तय करने तथा बीजों की जांच के लिए वर्षभर काम करने वाली प्रभावी प्रणाली विकसित करने की मांग की है।

    जिलाधिकारी की जवाबदेही तय करने का सुझाव

    पत्र में बीजों की गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जिलाधिकारी को उत्तरदायी बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही घर पर बीज उत्पादन को प्रोत्साहित करने और उसके संवर्धन के लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान करने की मांग भी रखी गई है।

    किसानों को आसानी से बीज उपलब्ध हो सकें, इसके लिए ग्राम पंचायत और ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर पर बीजों के भंडारण तथा उपलब्धता की जानकारी प्रकाशित करने की व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।

    राज्यों को अधिक अधिकार देने की मांग

    रामपाल जाट ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है। इसलिए राज्यों की स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए बीजों से संबंधित मामलों में राज्यों को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए।

    उन्होंने पत्र में कहा कि बीज व्यवस्था में विकेंद्रीकरण से नियंत्रण और पर्यवेक्षण को स्थानीय स्तर पर मजबूत किया जा सकता है। इससे अत्यधिक केंद्रीकृत व्यवस्था के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं से बचने की संभावना बढ़ेगी।

    किसान हितों को प्राथमिकता देने की अपील

    किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कृषि मंत्री से आग्रह किया कि बीज विधेयक 2025 का निर्माण करते समय किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की सुरक्षा और देश की खाद्य सुरक्षा एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं।

    रामपाल जाट ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से देशहित में किसानों की मांगों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक प्रावधान शामिल करने का आग्रह किया है।

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