जो हमे देव,शास्त्र एवं गुरू से जोड़े वहीं स्वाध्याय होता है, आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल में चातुर्मासिक प्रवचन
भीलवाड़ा। हम मोक्ष की साधना कर रहे है फल कब मिलेगा नहीं जानते। मेरे मन की एक ही प्रार्थना है कि विदेह क्षेत्र में जन्म हो ओर अपनी आंखों से एक बार सीमन्धर भगवान एवं तीर्थंकर के दर्शन कर सकू। एक बार जीवित तीर्थंकर को देखना चाहता हूं इसके अलावा मेरे जीवन का कोई लक्ष्य नहीं है। इस पंचम काल में कोई भी तीर्थंकर जैसा नहीं हो सकता। जिस दिन उनकी कृपा हो जाए ओर दृष्टि पड़ जाए मोक्ष के द्वार खुल जाएंगे।
ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में शुक्रवार को चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि आत्मा के लिए मानव देह किराए का मकान है जिसे एक दिन खाली करना ही पड़ेगा। कोई कितना भी शक्तिशाली बलशाली हो उसे देह का त्याग करना ही पड़ेगा। जब तक शरीर में बल होता आत्मा रहती है ओर बलहीन व निर्बल होते ही आत्मा शरीर बदल लेती है। उन्होंने कहा कि आत्मा शरीर के बल पर ही योग या भोग करती है। निर्बल होने पर न तो भोग में मन लगता है ओर न ही तपस्या साधना कर सकते है। शरीर में शक्ति होने पर ही योग या भोग संभव है। इसलिए जब तक शरीर आत्मा का साथ दे रहा है अधिकाधिक धर्म साधना कर ले फिर अवसर नहीं मिल पाएगा।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि इस युग में शुद्धोपयोगी मुनि नहीं हो सकते लेकिन शुभोपयोगी मुनि श्रावक से हर दृष्टि से श्रेष्ठ है। ऐसे मुनि शुभ ध्यान करते है लेकिन उनकी सहनन व्रज जैसी नहीं होती। ऐसे मुनि आपको एवं आपके बच्चों को संस्कार प्रदान करते है। स्वाध्याय वह होता है जो हमे देव,शास्त्र एवं गुरू से जोड़ता है जो हमारी आस्था को तोड़ता हो वह स्वाध्याय नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि शुभोपयोगी मुनि बनने का अधिकार भगवान महावीर देते है। ऐसे मुनि प्रतिदिन एक बार भोजन, दो बार प्रतिक्रमण, तीन बार सामायिक एवं चार बार स्वाध्याय करते है। विनम्रता साधुता की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि मुनि का फर्ज होता है कि श्रावक का मन नहीं बिगड़े ओर श्रावक का फर्ज होता है कि मुनि का तन नहीं बिगड़े। तुम मेरे तन का ओर मैं तुम्हारे मन का ध्यान रखूंगा क्योंकि मुनि तन की ओर श्रावक मन की परवाह नहीं करते है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में आयोजित होने वाले दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर के लिए अब तक सैकड़ो श्रावक श्राविकाएं पंजीयन करा चुके है।
प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन,पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य सीकर निवासी हीरालाल आदित्य जीविक रारा परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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