क्रिकेट के मैदान पर विराट कोहली को स्मरण करते ही सर्वप्रथम उनके आक्रामक शॉट्स, जोशीले उत्सव और खेल के प्रति अद्भुत समर्पण की छवि स्पष्ट होती है। किंतु कोहली ने केवल अपने बल्ले से ही नहीं, अपितु अपनी जीवनशैली, केशसज्जा और शारीरिक टैटू से भी पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया है। उनके दोनों हाथों पर बने टैटू मैदान से इतर उनके व्यक्तित्व का एक भिन्न एवं आध्यात्मिक पक्ष प्रस्तुत करते हैं।
कोहली के लिए टैटू मात्र कोई शारीरिक कलाकृति न होकर उनके व्यक्तिगत जीवन का संस्मरण हैं।
कोहली के टैटू में समाहित प्रतीक एवं उनका महत्व
ऑल-सीइंग आई: कर्मों के प्रति जवाबदेही और सर्वव्यापी ईश्वर की दृष्टि का प्रतीक।
जापानी समुराई: शक्ति, निष्ठा, अनुशासन और नैतिक आचरण का संदेश।
वनडे एवं टेस्ट कैप नंबर: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण और उपलब्धियों की स्मृतियां।
माता-पिता के नाम: परिवार के प्रति अगाध प्रेम एवं कृतज्ञता।
भगवान शिव एवं मठ: कैलाश पर्वत पर ध्यानावस्थित शिव और शांति हेतु मठ का अंकन।
ओम, स्कॉर्पियो व ट्राइबल डिजाइन: आध्यात्मिक आस्था और व्यक्तिगत राशि का प्रदर्शन।
बाएं हाथ की अधूरी स्लीव: निरंतर प्रगतिशील जीवन का प्रतीक
कोहली के बाएं हाथ का टैटू अभी भी पूर्ण नहीं हुआ है। उनके टैटू आर्टिस्ट के अनुसार, विगत तीन से अधिक वर्षों से इस पर कार्य चल रहा है। कोहली का मानना है कि जीवन समय के साथ परिवर्तित होता है और विचार विकसित होते हैं; अतः यह टैटू भी किसी एक दौर की स्थिर रचना न होकर निरंतर आगे बढ़ती जीवन यात्रा को दर्शाता है। हाल ही में उनके संग्रह में जल की सतह पर उठती तरंगों (रिपल्स) जैसा एक नया डिजाइन सम्मिलित हुआ है।
डिजाइन चयन प्रक्रिया में स्वयं सक्रिय रहते हैं कोहली
टैटू कलाकारों के अनुसार, विराट केवल एक मूक ग्राहक की भांति बैठकर टैटू नहीं बनवाते, अपितु वे संपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया को समझने का प्रयास करते हैं। वे डिजाइन के कोण, आकार और उसके पीछे के तर्कों पर कलाकारों से प्रश्न करते हैं। वे सुंदरता से अधिक उसके पीछे की भावना और कहानी को प्राथमिकता देते हैं।
मैच पूर्व टैटू और एथलीट्स की रिकवरी
सामान्य व्यक्तियों के विपरीत, पेशेवर अंतरराष्ट्रीय एथलीट अपने शरीर और रिकवरी तंत्र को भली-भांति समझते हैं। विराट कोहली और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी मैचों से कुछ दिवस पूर्व भी टैटू बनवाकर मैदान पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार आम नागरिकों को एथलीट्स की इस दिनचर्या का बिना चिकित्सीय देखरेख के अनुसरण नहीं करना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट संस्कृति में टैटू का बढ़ता चलन
सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के दौर में जहां सादगी और खेल ही पहचान का मुख्य माध्यम था, वहीं वर्तमान पीढ़ी में टैटू व्यक्तिगत पहचान का प्रमुख अंग बन चुका है।
हार्दिक पांड्या: अपने व्यक्तिगत संबंधों और भावनाओं को टैटू के माध्यम से दर्शाया।
तिलक वर्मा: भगवान शिव के प्रति अगाध श्रद्धा और माता-पिता के प्रति प्रेम का अंकन।
स्मृति मंधाना: महिला विश्व कप विजय की स्मृति को दाहिने हाथ पर टैटू के रूप में उकेरा।
अर्शदीप सिंह: व्यक्तिगत संबंधों की स्मृति को टैटू में ढाला।
केएल राहुल एवं शिखर धवन: शरीर पर अनेक अर्थपूर्ण टैटू संजोए हुए हैं।
विराट कोहली ने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्हें यह देखने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है कि वे जीवन में कहां से कहां पहुंचे हैं; वे केवल अपने दोनों हाथों को देखकर अपने संपूर्ण सफर का अनुभव कर सकते हैं। रन और शतकों से अलग, यह टैटू संग्रह उनके जीवन की एक खुली डायरी की भांति है।


