कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले राज्य का राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है। सुवेंदु अधिकारी और हुमायूं कबीर द्वारा एक-एक सीट छोड़ने के बाद इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की घोषणा हुई है, जिसके लिए आगामी 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को चुनावी नतीजे आएंगे। इस बीच, ममता बनर्जी की चुनावी रणनीतियों और कांग्रेस के रुख को लेकर नए समीकरण सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिश रही असफल
उपचुनावों से पहले ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ चुनावी तालमेल बिठाने की पहल की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल को फोन करके गठबंधन का प्रस्ताव रखा था। इस फॉर्मूले के तहत, ममता नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस का समर्थन चाहती थीं और इसके बदले रेजीनगर सीट पर कांग्रेस से टीएमसी उम्मीदवार के समर्थन की उम्मीद कर रही थीं। हालांकि, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
कांग्रेस ने ठुकराया प्रस्ताव, बताई ये वजह
कांग्रेस पार्टी की ओर से इस प्रस्ताव को अस्वीकार करने के पीछे मुख्य वजह टीएमसी शासन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कथित तौर पर हुए जुल्म और दुर्व्यवहार को बताया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि यदि टीएमसी वास्तव में गठबंधन चाहती है, तो उसे दोनों ही सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन करना होगा। आपसी सहमति न बन पाने के कारण यह गठबंधन परवान नहीं चढ़ सका।
दोनों सीटों पर कांग्रेस ने उतारे अपने उम्मीदवार
गठबंधन की बातचीत विफल होने के बाद कांग्रेस ने स्वतंत्र रूप से बड़ा कदम उठाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों ही सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है।
नंदीग्राम सीट: कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है, जबकि टीएमसी ने यहां से संचिता प्रधान डे को टिकट दिया है।
रेजीनगर सीट: कांग्रेस की ओर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी चुनाव लड़ेंगे, वहीं टीएमसी ने रबीउल आलम चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इन उपचुनावों में सभी प्रमुख दलों के आमने-सामने आ जाने से मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।


