पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को मंगलवार को दोहरी सफलता मिली। एक ओर ब्यूरो ने पुराने रिश्वत मामले में विशेष न्यायालय के माध्यम से पूर्व राजस्व कर्मचारी को सजा दिलाई, वहीं दूसरी ओर लखीसराय में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी को 28 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
– लखीसराय में 28 हजार रुपये लेते अधिकारी गिरफ्तार
निगरानी थाना कांड संख्या-108/26, दिनांक 10 सितंबर 2026 के आधार पर मुख्यालय की टीम ने लखीसराय जिले में कार्रवाई की। टीम ने ब्रजेश कुमार, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, हलसी प्रखंड तथा अतिरिक्त प्रभार चानन, को उनके कार्यालय कक्ष से 28 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। बताया गया कि परिवादी राम नारायण साव ने नाला निर्माण कार्य के भुगतान के लिए मापी पुस्तिका भरने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की शिकायत निगरानी ब्यूरो से की थी। शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक रणजीत कुमार निराला के नेतृत्व में धावा दल का गठन किया गया और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए अधिकारी को रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
– 2015 के रिश्वत मामले में पूर्व राजस्व कर्मचारी को सजा
इधर, पटना में निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने वर्ष 2015 के रिश्वत मामले में पूर्व राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र कुमार सिन्हा को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अमरेन्द्र कुमार सिन्हा फुलवारीशरीफ प्रखंड के हल्का नंबर-06 में तत्कालीन राजस्व कर्मचारी के पद पर तैनात थे। मामला 23 जनवरी 2015 का है। जमीन के नामांतरण के एवज में रिश्वत लेते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत तीन वर्ष सश्रम कारावास और 9 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत चार वर्ष सश्रम कारावास और 9 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
– 2026 में अब तक 21 मामलों में सजा
निगरानी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 21 मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से यह किसी एक वर्ष में हुई सबसे अधिक वार्षिक सजा कार्रवाई है। वर्ष 2025 में विशेष न्यायालय निगरानी द्वारा कुल 30 मामलों में सजा सुनाई गई थी। निगरानी ब्यूरो की ओर से लंबित मामलों में अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है।
– 2026 में 108 प्राथमिकी और 100वां ट्रैप कांड
ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 108वीं प्राथमिकी है। वहीं, यह इस साल का 100वां ट्रैप कांड है। इन मामलों में अब तक कुल 101 अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। निगरानी के अनुसार, इस दौरान रिश्वत के रूप में कुल 36 लाख 94 हजार 800 रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा 37 हजार रुपये कीमत की एक नई वॉशिंग मशीन भी बरामद की गई है। ब्यूरो का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


