मुंबई। वित्त मंत्रालय द्वारा यूपीआई (UPI) भुगतान पर लागू की गई संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) प्रणाली को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का प्रभार निर्धारित किया गया है। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें इस शुल्क से राहत नहीं दी गई, तो वे डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे, जिससे देश भर के आम वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कम मार्जिन के कारण उपभोक्ताओं पर बोझ डालना असंभव
पेट्रोल पंप डीलरों का तर्क है कि देश में ईंधन की कीमतें पूरी तरह से नियंत्रित हैं, जिसके चलते वे इस अतिरिक्त प्रभार को सीधे ग्राहकों से वसूलने की स्थिति में नहीं हैं। संचालकों का कहना है कि बीते कई वर्षों से उनके कमीशन में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि परिचालन और अनुपालन से जुड़ी लागत काफी बढ़ गई है। बेहद सीमित लाभ मार्जिन पर काम कर रहे पेट्रोल पंपों के लिए 0.4% का एमडीआर शुल्क सहना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।
'डिजिटल इंडिया' मुहिम के समक्ष संकट
पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'शून्य एमडीआर' (Zero MDR) के स्पष्ट वादे के आधार पर ही पेट्रोल पंपों ने डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे और संसाधनों में भारी निवेश किया था। वर्तमान समय में पेट्रोल और डीजल की कुल बिक्री का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कारोबार डिजिटल माध्यमों से ही संचालित होता है। ऐसे में इस संशोधित शुल्क प्रणाली ने डीलरों के समक्ष व्यावसायिक अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
वाहन चालकों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है असर
यदि पेट्रोल पंपों पर यूपीआई सेवाएं ठप होती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव रोजमर्रा के वाहन चालकों और ड्राइवरों पर पड़ेगा। आज के समय में अधिकांश लोग नकदी के बजाय पूरी तरह से डिजिटल वॉलेट और यूपीआई ऐप्स पर आश्रित हो चुके हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की खरीद के लिए नकदी की अनिवार्यता लागू होने से पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगने और आम लोगों को भारी असुविधा होने की आशंका है। डीलर एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ईंधन क्षेत्र को इस नई एमडीआर व्यवस्था से तत्काल छूट दी जाए।


