मुंबई। वरिष्ठ अभिनेत्री सोनी राजदान इन दिनों अपनी नवीनतम फिल्म 'ओम का हरि' के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं। हरीश व्यास के निर्देशन में निर्मित यह पारिवारिक हास्य-नाटक (कॉमेडी-ड्रामा) फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई है। इस अवसर पर अपने एक हालिया साक्षात्कार में सोनी राजदान ने कला और अभिनय के प्रति अपने दृष्टिकोण पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे एक कलाकार के रूप में खुद को किसी विशिष्ट दायरे या सीमाओं में सीमित नहीं रखतीं और प्रत्येक भूमिका को पूरे उत्साह के साथ निभाती हैं।
अभिनय के प्रति सोनी राजदान का दृष्टिकोण
एक प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी से संवाद करते हुए सोनी राजदान ने कहा, "एक कलाकार के रूप में मैं प्रत्येक चरित्र को समान ऊर्जा एवं उत्साह से देखती हूं। हर भूमिका अभिनेता से भिन्न अपेक्षाएं रखती है, और मैं उसी अनुसार खुद को तैयार करती हूं। मेरे विचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की पूर्वाग्रह या सीमाएं नहीं हैं।"
लोकप्रिय वेब सीरीज 'पंचायत' का दिया उदाहरण
साक्षात्कार के दौरान अभिनेत्री ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा पर विश्वास व्यक्त करते हुए लोकप्रिय वेब सीरीज 'पंचायत' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "यदि मुझे 'पंचायत' जैसी देहाती पृष्ठभूमि वाली सीरीज में भी अवसर मिले, तो मैं उस चरित्र में पूरी तरह ढल सकती हूं। शायद शुरुआत में दर्शकों को संशय हो, किंतु मैं अपने अभिनय से उन्हें आश्वस्त कर दूंगी। मुझे बस वह भूमिका सौंपी जाए; मैं पारम्परिक साड़ियां धारण कर उस चरित्र को पूरी सत्यता के साथ जीवंत कर सकती हूं।"
रंगमंच के अनुभवों को दिया सफलता का श्रेय
विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं में सहजता से ढलने की अपनी क्षमता का श्रेय सोनी राजदान ने अपने थिएटर (रंगमंच) के अनुभवों को दिया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपने अभिनय सफर का शुभारंभ दिग्गज रंगमंच निर्देशक सत्यदेव दुबे के मार्गदर्शन में किया था। थिएटर के दौरान उन्हें विभिन्न परिवेशों एवं शैलियों के पात्रों को निभाने का समृद्ध अनुभव प्राप्त हुआ।
फिल्म 'ओम का हरि' की पटकथा एवं मुख्य कलाकार
फिल्म 'ओम का हरि' में सोनी राजदान के साथ बहुमुखी अभिनेता रघुबीर यादव एवं अंशुमान झा मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म पिता और पुत्र के जटिल संबंधों पर केंद्रित है। कहानी जिद्दी पिता हरि प्रसाद शर्मा तथा अपनी शर्तों पर जीवन जीने वाले पुत्र ओम प्रसाद शर्मा के वैचारिक मतभेदों को दर्शाती है।
दोनों के मध्य का यह द्वंद्व उन्हें भोपाल से लेकर वाराणसी तक की यात्रा पर ले जाता है। फिल्म में सोनी राजदान ने 'सरोज' की भूमिका निभाई है, जो हरि की धर्मपत्नी एवं ओम की माता हैं तथा पिता-पुत्र के मध्य बिगड़ते संबंधों में सेतु का कार्य करती हैं।


