बीकानेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा रविवार को आयोजित उप निरीक्षक एवं प्लाटून कमांडर संयुक्त प्रतियोगी पुनः परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम देखने को मिले। निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा संचालन हेतु अभ्यर्थियों को बहुस्तरीय सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। केंद्रों पर नियमों का कड़ाई से पालन कराया गया, जिसके तहत मेटल के बटन लगी शर्ट पहनकर आए कई परीक्षार्थियों को अपने वस्त्र बदलने पड़े। इसके अतिरिक्त, हाथ में बंधे कलेवे (मौली) तथा अन्य धातुयुक्त वस्तुओं को उतरवाने के पश्चात ही अभ्यर्थियों को परिसर के भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई।
दो पारियों में संपन्न हुई परीक्षा, निर्धारित समय पूर्व प्रवेश बंद
बीकानेर जनपद के 47 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस पुनः परीक्षा में कुल 13,584 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। परीक्षा का आयोजन दो पारियों में किया गया; प्रथम पाली में 'सामान्य हिंदी' तथा द्वितीय पाली में 'सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान' का प्रश्नपत्र आयोजित हुआ। परीक्षा प्रारंभ होने के निर्धारित समय से ठीक एक घंटा पूर्व केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए और देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया।
आठ उड़नदस्तों एवं सीसीटीवी कैमरों से रखी गई पैनी नजर
परीक्षा को पूर्णतः शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने हेतु जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे। निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु 8 उड़नदस्तों (फ्लाइंग स्क्वाड) का गठन किया गया, जबकि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर दो-दो वीडियोग्राफर तैनात रहे। संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी में संचालित हुई। प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त पुलिस बल तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेट की तैनाती सुनिश्चित की गई थी। अनुचित साधनों के प्रयोग एवं फर्जीवाड़े को रोकने के उद्देश्य से परीक्षा केंद्रों के 300 मीटर के दायरे में स्थित समस्त साइबर कैफे, ई-मित्र केंद्रों तथा फोटोस्टेट दुकानों को प्रातः 6 बजे से सायं 6 बजे तक बंद रखने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
प्रशासन एवं पुलिस का सख्त रुख
क्षेत्राधिकारी (सीओ सिटी) अनुज डाल ने जानकारी दी कि परीक्षा के दृष्टिगत त्रिस्तरीय सुरक्षा तंत्र सक्रिय किया गया था। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी अथवा अव्यवस्था को रोकने हेतु परीक्षा से जुड़े समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कड़े अनुशासन का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। राज्य की अति-संवेदनशील भर्ती परीक्षाओं में शामिल इस पुनः परीक्षा को लेकर आयोग एवं जिला प्रशासन पूर्णतः सतर्क दिखाई दिया, जिसके चलते अभ्यर्थियों की तलाशी से लेकर केंद्रों की निगरानी तक प्रत्येक स्तर पर अभूतपूर्व मुस्तैदी देखी गई।


