महापौर मतदान के बीच पारदर्शिता को लेकर सियासी घमासान, योगेश मिश्रा और टीकाराम जूली ने जताई आपत्ति; संजय शर्मा ने आरोपों को बताया राजनीति
अलवर। अलवर नगर निगम के महापौर चुनाव के दौरान सोमवार को राजनीतिक हलचल तेज रही। पार्षदों की शपथ प्रक्रिया पूरी होने के बाद महापौर पद के लिए मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। महापौर पद के लिए भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा आमने-सामने थीं। 65 सदस्यीय निगम में महापौर चुनाव के लिए 33 पार्षदों का समर्थन बहुमत के लिए जरूरी था।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए एक व्यक्ति के निगम परिसर के अंदर मौजूद रहने पर आपत्ति जताई। मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़ा एक कार्यकर्ता करीब एक घंटे से अंदर बैठा हुआ था और सवाल यह है कि उसे वहां बैठने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
मिश्रा ने कहा कि पूरे मामले में क्या स्थिति रही, इसकी जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
संजय शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों पर किया पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर वन मंत्री संजय शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आरोप लगाती रहती है। शर्मा के अनुसार भाजपा शहर में सड़क, पानी और बिजली जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में थी और पार्टी का उद्देश्य जनता के हित में काम करना है।
इस दौरान भाजपा खेमे की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता बताया गया।
टीकाराम जूली भी नजर आए नाराज
महापौर चुनाव के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी एक घटनाक्रम को लेकर नाराज नजर आए। मालाखेड़ा क्षेत्र से कांग्रेस के पार्षद नगर निगम परिसर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान भाजपा का एक प्रत्याशी वहां पहुंच गया, जिसको लेकर जूली ने आपत्ति जताई।
इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है। जूली ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए।
निर्दलीय पार्षदों की भूमिका रही अहम
अलवर नगर निगम के चुनाव परिणामों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा को 28, कांग्रेस को 23, निर्दलीय पार्षदों को 13 और बसपा को एक सीट मिली थी। ऐसे समीकरण में 33 के बहुमत आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों प्रमुख दलों के लिए अतिरिक्त समर्थन महत्वपूर्ण था।
चुनाव से पहले भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही थी। इसी वजह से महापौर चुनाव से पहले अलवर में राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई थीं।
मतदान के दौरान हर मत पर टिकी नजर
महापौर चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। राजस्थान के कई निकायों में चुनाव परिणामों के बाद इसी तरह के समीकरण बने, जहां स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई थी।
अलवर में भी महापौर चुनाव के दौरान इसी राजनीतिक गणित के चलते प्रत्येक मत पर नजर रही। चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों और भाजपा की ओर से दिए गए जवाबों के बीच निगम परिसर में राजनीतिक माहौल गर्म रहा।
नतीजे ने साफ की नगर निगम की तस्वीर
महापौर चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिणाम सामने आया और भाजपा की सुमनलता अग्रवाल विजयी रहीं। चुनाव परिणाम के अनुसार उन्हें 42 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शर्मा को 23 मत मिले। इसके साथ सुमनलता अग्रवाल अलवर नगर निगम की पहली महापौर निर्वाचित हुईं।
अब नए महापौर और नगर निगम बोर्ड के सामने शहर की बुनियादी सुविधाओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। चुनाव के दौरान उठे पारदर्शिता और प्रक्रिया संबंधी सवालों के बीच आगे निगम की कार्यप्रणाली पर भी शहरवासियों की नजर रहेगी।
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