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    अलवर में गूंजा संत दुर्बल नाथ महाराज का जयघोष, निकली भव्य शोभायात्रा

    हजारों श्रद्धालुओं ने बढ़ाया आयोजन का गौरव, अशोक टॉकीज से खटीक छात्रावास तक निकली 165वीं शोभायात्रा

    अलवर। राष्ट्रीय संत श्री दुर्बल नाथ महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को खटीक समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्री राष्ट्रीय संत दुर्बल नाथ जयंती एवं विवाह समारोह समिति तथा खटीक समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शोभायात्रा में समाज के हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के बीच निकली शोभायात्रा में संत दुर्बल नाथ महाराज के जीवन और संदेशों को दर्शाती विभिन्न झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

    शोभायात्रा अशोक टॉकीज से रवाना हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जेल चौराहा स्थित खटीक छात्रावास पहुंची। यात्रा में ऊंट, घोड़े, ताशा पार्टी, बैंड और ध्वनि यंत्रों के साथ विभिन्न झांकियां शामिल रहीं। शोभायात्रा के अंत में राष्ट्रीय संत दुर्बल नाथ महाराज की प्रतिमा की झांकी निकाली गई, जिसके दर्शन के लिए समाज के लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    165वीं शोभायात्रा में उमड़ा समाज

    खटीक छात्रावास के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय संत श्री दुर्बल नाथ महाराज की जयंती के अवसर पर खटीक समाज की ओर से इस वर्ष 165वीं शोभायात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि शोभायात्रा को लेकर समाज के लोगों में पहले से ही उत्साह था और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष इसमें शामिल हुए।

    शोभायात्रा अशोक टॉकीज से शुरू होकर त्रिपोलिया बाजार, ऑफ सर्कस, घंटाघर और भगत सिंह चौराहा होते हुए जेल चौराहा स्थित खटीक छात्रावास पहुंची।

    झांकियों ने बताया संत के जीवन का संदेश

    शोभायात्रा में संत दुर्बल नाथ महाराज के जीवन से जुड़े प्रसंगों को दर्शाती झांकियां सजाई गईं। धार्मिक और सामाजिक संदेशों से जुड़ी झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बैंड, ताशा पार्टी और अन्य वाद्य दलों के साथ शोभायात्रा आगे बढ़ती रही। मार्ग में समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया।

    खटीक छात्रावास में भंडारे का आयोजन

    शोभायात्रा के समापन के बाद जेल चौराहा स्थित खटीक छात्रावास में भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजन समिति की ओर से समाज के लोगों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। जयंती समारोह के दौरान समाज के लोगों ने संत दुर्बल नाथ महाराज के आदर्शों और उनके संदेशों को स्मरण करते हुए सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

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