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    दसलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना, आत्मशुद्धि का दिया संदेश

    आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक और शांतिधारा के साथ विशेष पूजा, तप को बताया आत्मा के कर्ममल दूर करने का माध्यम

    लक्ष्मणगढ़। जैन दर्शन के दसलक्षण पर्व के सातवें दिन मंगलवार को कस्बे के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम तप धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। इस अवसर पर भगवान का अभिषेक, विश्व कल्याण और समाज में शांति की कामना के लिए शांतिधारा तथा विशेष पूजा-अर्चना की गई।

    धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तम तप धर्म के आध्यात्मिक महत्व को समझते हुए आत्मसंयम, अनुशासन और आत्मशुद्धि का संकल्प लिया। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया।

    तप का अर्थ इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मसंयम

    जैन दर्शन में उत्तम तप धर्म को आत्मा की शुद्धि और कर्मों के क्षय की साधना से जोड़ा गया है। इसमें इच्छाओं का निरोध, शरीर, वाणी और मन पर अनुशासन तथा आत्मसंयम को विशेष महत्व दिया जाता है।

    श्रद्धालुओं के अनुसार तप केवल शारीरिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को अपनी इच्छाओं और विकारों पर नियंत्रण रखने की प्रेरणा देता है। सच्ची श्रद्धा, अहिंसा और संयम के साथ किया गया तप आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

    तप से विकसित होते हैं धैर्य और सहनशीलता

    समाजसेवी सुमत चंद जैन ने बताया कि तप का उद्देश्य आत्मा के शत्रुओं पर विजय प्राप्त करना है। तप के माध्यम से नैतिक गुणों का विकास होता है और इसके लिए आत्मसंयम तथा अनुशासन आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि धैर्य और सहनशीलता जैसे गुणों का विकास भी तप की साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तप मनुष्य को अपने दोषों को पहचानने और सद्गुणों को विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने तप की महिमा बताते हुए कहा कि तपस्या से मनुष्य के भीतर आत्मबल और तेज का विकास होता है।

    सोने की तरह तपकर निर्मल होती है आत्मा

    उत्तम तप धर्म के आध्यात्मिक संदेश को समझाते हुए बताया गया कि जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर शुद्ध और चमकदार होता है, उसी प्रकार तप की साधना से आत्मा पर जमे कर्मों के मैल को दूर करने का प्रयास किया जाता है।

    जैन दर्शन में तप को आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करने की साधना माना गया है। इसलिए दसलक्षण पर्व के दौरान उत्तम तप धर्म की आराधना को आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक विकास से जोड़कर देखा जाता है।

    मंदिर में दिनभर रहा धार्मिक वातावरण

    दसलक्षण पर्व के सातवें दिन आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    दसलक्षण पर्व के इस चरण में श्रद्धालु बाहरी आडंबर के बजाय आत्मसंयम, अहिंसा, तप और आत्मशुद्धि जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश लेते नजर आए।

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