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    103 साल पुरानी झांकी परंपरा में इस बार दिखेगा नया रंग, धार्मिक-सामाजिक संदेशों पर जोर

    इंदौर। इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर्व के अवसर पर निकलने वाली ऐतिहासिक झांकी यात्रा के लिए शहर पूरी तरह सज-धज कर तैयार है। लगभग 103 वर्ष पुरानी इस गौरवशाली परंपरा के अंतर्गत 25 सितंबर की सायं 6 बजे से 22 से अधिक भव्य एवं आकर्षक झांकियां शहर के प्रमुख मार्गों पर भ्रमण करेंगी। कपड़ा मिल परिसरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है, वहीं नागरिक इस बार की नवीन थीम, मनमोहक विद्युत सज्जा और जीवंत कलाकृतियों को देखने के लिए उत्सुक हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर इंदौर की सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

    विभिन्न मिलों और संस्थाओं के कारीगर व कलाकार अंतिम तैयारियों में जुटे हुए हैं। झांकियों में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक लाइटिंग, साउंड इफेक्ट्स और स्वचालित (मूविंग) मॉडलों की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि निर्धारित समय पर झांकियों का कारवां रवाना हो सके।

    103 वर्षों का समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास

    इंदौर की झांकी परंपरा एक शताब्दी से भी अधिक प्राचीन है। यह मालवा अंचल का सबसे वृहद सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार, अतीत में झांकियां देखने के लिए मालवा क्षेत्र के ग्रामीण व दूर-दराज के शहरों से लोग तीन-चार दिन पूर्व ही इंदौर आ जाते थे। सगे-संबंधियों के यहां रुकना और मुख्य मार्गों के किनारे स्थान आरक्षित कर बैठना इस उत्सव की विशेष परंपरा रही है। कालक्रम के अनुसार निर्माण तकनीक में बदलाव अवश्य आया है, किंतु जन-उत्साह आज भी अटूट है।

    आधुनिक तकनीक के साथ सुरक्षा एवं यातायात के कड़े प्रबंध

    प्रारंभिक दौर में जहां लकड़ी, मिट्टी और कपड़ों से झांकियां निर्मित की जाती थीं, वहीं वर्तमान में आधुनिक लाइटिंग, रोबोटिक्स और साउंड इफेक्ट्स का उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद पौराणिक कथाओं व धार्मिक मूल्यों को मौलिक रूप में बनाए रखा गया है।

    लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और यातायात व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि नागरिकों को आवागमन में असुविधा न हो।

    22 झांकियों में सजीव होंगे पौराणिक प्रसंग एवं सामाजिक संदेश

    इस वर्ष निकलने वाली झांकियों में पौराणिक गाथाओं के साथ-साथ महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों का समावेश किया गया है:

    • श्री खजराना गणेश मंदिर: परंपरा अनुसार सबसे प्रथम झांकी श्री खजराना गणेश मंदिर की होगी।

    • प्रमुख संस्थाएं: इसके पश्चात शास्त्री कॉर्नर, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA), नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल और राजकुमार मिल सहित अन्य संस्थाओं की झांकियां क्रमबद्ध निकलेंगी।

    • विशेष प्रसंग:

      • स्वदेशी मिल: मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध, भगवान शिव-सती प्रसंग तथा नशामुक्ति पर केंद्रित जागरूकता संदेश।

      • कल्याण मिल: भगवान जगन्नाथ की प्रथम रथयात्रा और भारत की महान नारी शक्तियों पर आधारित झांकियां।

      • होप टेक्सटाइल: गणेश वंदना एवं शिव बारात के दृश्य का सजीव प्रस्तुतीकरण।

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