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    रतलाम के सांदीपनि स्कूल की बड़ी उपलब्धि, दिल्ली में मिला अराइज अवॉर्ड 2026

    रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम शहर स्थित सांदीपनि विद्यालय विनोबा हायर सेकंडरी स्कूल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता की नई इबारत लिखी है। देश के प्रतिष्ठित संगठन फिक्की (FICCI) द्वारा आयोजित 'अराइज अवॉर्ड्स 2026' में स्कूल ने 'टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट' यानी शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की श्रेणी में पूरे भारत में पहला स्थान हासिल किया है। नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भव्य 'अराइज लर्निंग फेस्टिवल' के दौरान स्कूल के वाइस प्रिंसिपल गजेंद्र सिंह राठौर को इस उपलब्धि के लिए ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों और फिक्की के दिग्गजों ने की तारीफ

    पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान फिक्की के वरिष्ठ निदेशक डॉ. राजेश पंकज और अराइज के अध्यक्ष डॉ. अरुणभ सिंह ने सांदीपनि विद्यालय की टीम को सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर उपस्थित अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद पैट्रिक दरहम और निकोले बेंचार्ड ने रतलाम के इस स्कूल में शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए अपनाए जा रहे शैक्षणिक मॉडल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने का यह मॉडल देश के अन्य स्कूलों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    700 से अधिक स्कूलों को पछाड़कर पाया पहला स्थान

    राष्ट्रीय स्तर की इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल करना सांदीपनि विद्यालय के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। इस प्रतियोगिता की चयन प्रक्रिया तीन जटिल चरणों में संपन्न हुई, जिसमें शुरुआत में देश भर के 700 से अधिक प्रतिष्ठित विद्यालयों ने अपना दावा पेश किया था। गहन दस्तावेज जांच और जमीनी कार्यों के मूल्यांकन के बाद केवल 63 स्कूल अंतिम चरण तक पहुंच पाए। इसके बाद 12 सितंबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में ग्रैंड जूरी के समक्ष अंतिम प्रेजेंटेशन और साक्षात्कार दौर आयोजित किया गया था।

    'साइकल ऑफ ग्रोथ' मॉडल ने जूरी को किया प्रभावित

    अंतिम दौर में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक और वाइस प्रिंसिपल गजेंद्र सिंह राठौर ने जूरी के समक्ष स्कूल के विशेष 'साइकल ऑफ ग्रोथ' मॉडल का प्रभावी ढंग से प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि स्कूल में पारम्परिक शिक्षण पद्धतियों से हटकर नवोन्मेषी कार्य संस्कृति अपनाई जा रही है। इसके तहत शिक्षकों को देश-विदेश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों की सर्वश्रेष्ठ तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे आज की नई पीढ़ी की मानसिक क्षमता और आधुनिक जरूरतों के अनुसार अध्यापन करा सकें।

    शिक्षकों को नया सीखने और नवाचार की आजादी

    विद्यालय प्रशासन का मानना है कि समय के साथ शिक्षण शैली में निरंतर बदलाव आवश्यक है। इसी सोच के तहत स्कूल परिसर में एक ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार किया गया है जहां शिक्षक खुद को लगातार अपडेट करते हैं और कक्षाओं में नए-नए प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। जब शिक्षक स्वयं को नई तकनीकों और ज्ञान से लैस रखेंगे, तभी वे विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकेंगे। निरंतर सीखने की इसी अनूठी सोच का परिणाम है कि रतलाम के इस स्कूल को देश भर में सर्वोच्च सम्मान मिला है।

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