जैन मंदिरों में हुए कलशाभिषेक, मुनि सौम्य सागर महाराज ने बताया आत्मशुद्धि का मार्ग
अलवर। दिगम्बर जैन समाज में रविवार को क्षमा वाणी पर्व पारंपरिक श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के लोगों ने एक-दूसरे से क्षमा याचना की और वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी।
क्षमा वाणी के अवसर पर जैन समाज के लोग अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के घर पहुंचे तथा परस्पर क्षमा याचना की। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। समाज के लोगों ने आपसी मनमुटाव और राग-द्वेष को समाप्त कर सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया।
इस अवसर पर अलवर शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में कलशाभिषेक सहित धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लिया और विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
मुनि सौम्य सागर महाराज ने बताया क्षमा का महत्व
स्थानीय स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन में विराजमान दिगम्बर जैन मुनि सौम्य सागर महाराज एवं मुनि श्री निश्चल सागर जी महाराज ने क्षमा वाणी के महत्व पर प्रवचन दिए।
मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि क्षमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के नजदीक आने का अवसर है। यह अपने कर्मों की निर्जरा करने का मार्ग भी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने भीतर किसी दूसरे के प्रति रखे गए राग-द्वेष को समाप्त करने के लिए क्षमा का मार्ग अपनाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि क्षमा वाणी को केवल परंपरा के रूप में न मनाएं, बल्कि मन से अहंकार को दूर कर इसे आत्मशुद्धि और आपसी प्रेम का माध्यम बनाएं। सच्ची क्षमा तभी सार्थक है, जब मन में किसी के प्रति द्वेष न रहे और व्यक्ति स्वयं भी दूसरों को हृदय से क्षमा करे।
क्षमा वाणी पर्व के दौरान अलवर में जैन समाज के विभिन्न मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर दिनभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया।
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