गुरुग्राम। हरियाणा सरकार ने ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जमीन मालिकों से आपसी सहमति से जमीन खरीदने की नीति विफल होने के बाद अब सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत जमीनों का अधिग्रहण करने का निर्णय लिया है।
क्यों फेल हुई आपसी सहमति नीति?
नीति की असफलता: जीएमआरएल (गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड) की इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए गत 8 जनवरी को जमीन खरीद नीति की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में एक 9 सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ था, जिसे बातचीत के जरिए जमीन खरीदनी थी।
असहयोग: जिला प्रशासन द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति के तहत सिर्फ 5 प्रतिशत जमीन मालिक ही अपनी जमीन बेचने के लिए राजी हुए, जबकि करीब 95 प्रतिशत मालिकों ने इस नीति के तहत जमीन देने से साफ इनकार कर दिया।
प्रोजेक्ट और भूमि की आवश्यकता
रूट की लंबाई: ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट करीब 30.5 किलोमीटर लंबा है, जो मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से डीएलएफ साइबर सिटी तक तैयार किया जाना है।
पहला चरण और डिपो: पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक मेट्रो मार्ग का टेंडर आवंटित किया जा चुका है, वहीं सेक्टर-33 में मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।
किन गांवों की जमीन की जरूरत? जिला प्रशासन के अनुसार, पहले चरण और डिपो के लिए मुख्य रूप से तीन गांवों—कन्हेई (सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल की 534 वर्ग मीटर जमीन), इस्लामपुर (8,653 वर्ग मीटर) और बसई (1,695 वर्ग मीटर)—की कुल करीब 10,883 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है।
जिला उपायुक्त उत्तम सिंह की अध्यक्षता में जमीन मालिकों के साथ कई दौर की बैठकें बेनतीजा रहने के बाद, अब प्रशासन ने प्रोजेक्ट में और देरी से बचने के लिए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण का रास्ता चुना है।


