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    ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है। इस याचिका में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और सामूहिक रूप से निहित शक्तियों के केंद्रीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    याचिका में लगाए गए मुख्य आरोप

    राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर इस याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है:

    • निर्णयों में असहमति और बहुमत का नियम: चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) और दो चुनाव आयुक्त (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) होते हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी मुद्दे पर आम सहमति न बनने पर फैसला बहुमत के आधार पर होना चाहिए।

    • शक्तियों का केंद्रीकरण: याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर ऐसे कई फैसले लिए जा रहे हैं, जिन्हें अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी या सहमति हासिल नहीं है।

    • प्रमुख आपत्तियां: याचिका के अनुसार, बैठकों के कार्यवृत्त (Minutes) जारी करने में देरी, मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव और अन्य सदस्यों की जानकारी के बिना आयोग के नाम पर अपील दायर करने जैसे कदम उठाए गए हैं।

    • दर्ज आपत्तियां: याचिका में दावा किया गया है कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना उठाए गए कदमों को लेकर कम से कम 14 अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

    कानूनी पहलू और ‘क्वो वारंटो’ रिट की मांग

    • मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023: याचिका में इस अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया है कि कानून के अनुसार आयोग का काम सर्वसम्मति से या सदस्यों के बहुमत के आधार पर होना चाहिए।

    • क्वो वारंटो (Quo Warranto) की मांग: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से 'क्वो वारंटो' रिट जारी करने की मांग की है। इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत उन शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत सामूहिक रूप से पूरे चुनाव आयोग में निहित हैं।

    यदि अदालत में यह साबित होता है कि वैधानिक प्रक्रियाओं या अन्य सदस्यों की अनिवार्य भागीदारी के बिना अधिकारों का इस्तेमाल किया गया है, तो याचिका में ऐसे फैसलों को अमान्य घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

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