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    प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार का नया प्लान, LNG वाहनों को भी मिल सकता है फायदा

    नई दिल्ली (दिल्ली)। देश के बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही 'परिवर्तन योजना' को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार अब इस योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सीएनजी (CNG) और बीएस (BS-6) मानकों वाले वाहनों के साथ-साथ 'एलएनजी' (तरलीकृत प्राकृतिक गैस – LNG) से चलने वाले भारी वाहनों को भी शामिल करने पर गंभीर रूप से विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो एलएनजी वाहनों के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) करने वाली कंपनियों के साथ-साथ इसके वाहन मालिकों को भी प्रत्यक्ष रूप से इसका बड़ा वित्तीय और व्यावसायिक लाभ मिलेगा।

    परिवर्तन योजना का मुख्य उद्देश्य और वर्तमान प्रगति

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तत्त्वावधान में संचालित इस महत्त्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पुराने तथा जर्जर कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाना और उनकी जगह स्वच्छ, हरित एवं आधुनिक तकनीक वाले वाहनों को बढ़ावा देना है। इस योजना के प्रावधानों के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि सड़कों पर चलने वाली बसें और भारी ट्रक या तो इलेक्ट्रिक (EV), सीएनजी या फिर नवीनतम बीएस-6 (BS-VI) मानकों के अनुरूप होने चाहिए। सरकार पुराने वाहनों को स्कोर्स करने या बदलने के लिए वाहन स्वामियों को विभिन्न प्रोत्साहन भी प्रदान कर रही है।

    मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में आरंभ हुई इस योजना के तहत अब तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में 14,000 से अधिक बसों और भारी ट्रकों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि आगामी महीने यानी अक्टूबर के अंत तक कुल 25,000 वाहनों के पंजीकरण का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    लंबी दूरी के भारी वाहनों के लिए एलएनजी क्यों है विशेष?

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने एलएनजी को विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा तय करने वाले भारी ट्रकों और यात्री बसों के लिए एक बेहतरीन, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल वैकल्पिक ईंधन के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया है। बोर्ड द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2030 तक लगभग 30,000 एलएनजी चालित वाहन सड़कों पर दौड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि वर्ष 2040 तक इनकी कुल संख्या में भारी उछाल आने से यह बढ़कर 2 लाख से 5 लाख तक पहुँच सकती है।

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