मुंबई। होटल के फायर सर्टिफिकेट और अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में मुंबई अग्निशमन दल के दो केंद्र अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई की है। एसीबी के अनुसार, होटल को फायर सर्टिफिकेट दिलाने के लिए शुरुआत में 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद यह रकम घटाकर 1.50 लाख रुपये तय हुई। मामले में फोर्ट फायर स्टेशन के केंद्र अधिकारी अमोल मुलीक को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एसीबी ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। वहीं, मेमनवाड़ा फायर स्टेशन के केंद्र अधिकारी अरुण देवाले को भी हिरासत में लिया गया है।
फायर सर्टिफिकेट के लिए मांगी रिश्वत
एसीबी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने होटल के फायर परमिट के लिए पहले ही 60 हजार रुपये का भुगतान किया था। इसके अलावा फायर सर्टिफिकेट की ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 9 हजार रुपये का टोकन शुल्क भी जमा किया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और फायर सर्टिफिकेट जारी करने के लिए अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त रकम की मांग की गई। शुरुआत में 2 लाख रुपये मांगे गए, जिसके बाद बातचीत के दौरान कथित तौर पर 1.50 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
80 हजार रुपये लेते रंगेहाथ पकड़ा
एसीबी के अनुसार, तय रकम में से शेष 80 हजार रुपये स्वीकार करते समय अमोल मुलीक को 29 सितंबर को मुंबई एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर अरुण देवाले के कहने पर अमोल मुलीक ने स्वीकार की थी। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
आवासों पर देर रात तक चली तलाशी
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के आवासों की तलाशी ली गई, जो देर रात तक जारी रही। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि तलाशी के दौरान मामले से जुड़े कोई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज या साक्ष्य मिले हैं या नहीं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच
एसीबी की ओर से बताया गया है कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू है। पूरे प्रकरण की आगे की जांच जारी है। मुंबई अग्निशमन दल के अधिकारियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद विभाग में भी हलचल मची हुई है।


