पटना। देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लेते हुए बिहार और झारखंड की सरकारों को राज्य के स्वामित्व वाले पाँच बंद हो चुके निगमों से जुड़े दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और कामगारों को एकमुश्त एक-एक लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का सख्त निर्देश दिया है। माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने दोनों राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि वे ब्याज सहित संपूर्ण बकाया राशि का भुगतान आगामी तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। इस महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश से दोनों राज्यों के 600 से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से बड़ी राहत मिलने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला 'बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000' के लागू होने के बाद राज्य के स्वामित्व वाले पाँच बंद पड़े सार्वजनिक निगमों के कर्मचारियों की देनदारियों और सेवा संबंधी बकाये के सही बँटवारे से जुड़ा हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक अभिलेखों में यह मामला 'बिहार राज्य अर्ध सरकारी अराजपति कर्मचारी महासंघ बनाम बिहार राज्य (W.P.(C) No. 932/2022)' के रूप में दर्ज है।
ईपीएफ बकाये पर 12% और अन्य भुगतानों पर 6% वार्षिक ब्याज
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विलंब से दिए जाने वाले कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के बकाये पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देना होगा। इसके अतिरिक्त, देरी से भुगतान किए जाने वाले वेतन, पारिश्रमिक, मजदूरी और अन्य मौद्रिक बकाये पर 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देय होगा। ब्याज की यह गणना राशि के देय होने की प्रारंभिक तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान किए जाने की तिथि तक की जाएगी। यह संपूर्ण धनराशि पात्र कर्मचारियों अथवा उनके वैध कानूनी उत्तराधिकारियों (नॉमिनियों) के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी।
चार सप्ताह के भीतर कर्मचारियों का विवरण सार्वजनिक करने का आदेश
इस पूरी भुगतान प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शीर्ष अदालत ने बिहार और झारखंड सरकार को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे आगामी चार सप्ताह के भीतर सभी संबंधित कर्मियों और कामगारों की अद्यतन सूची व जानकारी सार्वजनिक करें। यह विस्तृत विवरण दोनों राज्यों के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर अनिवार्य रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
दैनिक वेतनभोगियों के लिए एक लाख रुपये की अतिरिक्त राहत
शीर्ष अदालत का यह प्रमुख आदेश मुख्य रूप से 'बिहार स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन' के 598 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और कामगारों से संबंधित है। इन सभी कर्मियों के बकाये की गणना वर्ष 1992 से लेकर संबंधित कर्मचारी की सेवानिवृत्ति, मृत्यु अथवा सेवा की औपचारिक समाप्ति की तिथि तक मात्र 42.50 रुपये प्रतिदिन की पुरानी दर से की गई थी। इस पुरानी और अल्प निर्धारित दर के आधार पर पूर्व में 467 दैनिक वेतनभोगियों को कुल 14.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि पिछले कई दशकों तक मात्र 42.50 रुपये प्रतिदिन की एक ही निर्धारित दर से बकाये की गणना करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत और उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस मानवीय और तार्किक पहलू को ध्यान में रखते हुए अदालत ने प्रत्येक संबंधित दैनिक वेतनभोगी को एक लाख रुपये का अतिरिक्त एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया है। 598 कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होने से कुल 5.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भुगतान किया जाएगा।
विवाद के दायरे में शामिल पाँच बंद पड़े निगम
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से राज्य के स्वामित्व वाले निम्नलिखित पाँच निगमों से संबंधित है:
बिहार राज्य निर्माण निगम लिमिटेड
बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (BSIDC)
बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लिमिटेड
बिहार राज्य वन विकास निगम लिमिटेड
बिहार राज्य पंचायती राज वित्तीय निगम लिमिटेड
झारखंड में भी लंबित हैं कर्मचारियों के मामले
दूसरी ओर, झारखंड उच्च न्यायालय में 'बीएसआईडीसी कामगार यूनियन' सहित अन्य से जुड़ी याचिकाओं पर भी लंबे समय से सुनवाई चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण झारखंड उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। बीएसआईडीसी के पाँच बंद कारखानों के लगभग 600 कर्मचारियों का मामला भी यहाँ लंबित है, जिसमें विशेष रूप से झारखंड क्षेत्र में स्थित 'ईईएफ इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्टरी', 'हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी' और 'स्वर्णरेखा घड़ी कारखाने' के कर्मचारियों से जुड़े मामले शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस ताजा और स्पष्ट आदेश का सकारात्मक प्रभाव झारखंड के इन लंबित मामलों पर भी निश्चित रूप से पड़ेगा।


