कंपनी बाग में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए क्रांतिकारी विचारों को किया याद, युवाओं से भगत सिंह के आदर्श अपनाने का आह्वान
अलवर। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) अलवर की ओर से कंपनी बाग स्थित शहीद स्मारक पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर, पुष्पांजलि अर्पित करने और सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद नाटक-पाठ, गीत, गजल, कविता और बांसुरी वादन के माध्यम से शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
नाटक-पाठ के जरिए मंटो के जीवन और लेखन को किया प्रस्तुत
कार्यक्रम में अनूप त्रिवेदी के नाटक पस-ए-मंजर का पाठ किया गया। यह प्रस्तुति मंटो के जीवन और लेखन पर केंद्रित रही। इसमें महेंद्र सिंह किताब वाला ने मंटो की भूमिका, राजेश भारद्वाज ने कुली और मंजू चौहान ने महिला पात्र का पाठ किया।
नाटक-पाठ के माध्यम से साहित्य और रंगमंच की अभिव्यक्ति को मंच मिला। उपस्थित लोगों ने इस प्रस्तुति के जरिए मंटो के जीवन और लेखन से जुड़े प्रसंगों को सुना।
गीतों और कविताओं से भगत सिंह को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कलाकारों और साहित्यकारों ने गीत, गजल तथा कविता-पाठ प्रस्तुत किए। सीमा कालरा ने खुद को मैं खुशकिस्मत जानूं, मोहम्मद रफीक खान ने सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु और अशफाकउल्ला खान के बलिदान पर आधारित रचना प्रस्तुत की।
झारखंड से आए साथी उमेश तूरी ने ‘काला हीरा हूं, खान से निकल कर आया हूं और झारखंड का बेटा हूं’ तथा ‘जागो ए नौजवानों, मां भारती है पुकारती’ की प्रस्तुति दी। रामचरण ‘राग’ ने सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर केंद्रित अपनी रचनाओं का पाठ किया।
प्रदीप माथुर ने भगत सिंह के विचारों को स्मरण करने वाली कविता प्रस्तुत की। माला भारद्वाज ने कर चले हम फिदा जानो-तन साथियों, मनमोहन सिंह ने देश मेरे, तेरी जान के सदके, राजेश महिवाल ने ‘ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के’ और सरिता भारत ने ओ दिल्ली के शहंशाहों की प्रस्तुति दी।
इप्टा अलवर की सामूहिक प्रस्तुति फांसी का फंदा झूल गया, दीवाना भगत सिंह और दुनिया को सबक दे गया मस्ताना भगत सिंह ने शहीद भगत सिंह के बलिदान को याद किया। रईसा ने तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर गीत प्रस्तुत किया।
बांसुरी की धुनों ने बांधा समां
कार्यक्रम में वरिष्ठ साथी सुभाष नकड़ा ने आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की और मेरे देश की धरती सोना उगले गीतों पर बांसुरी वादन किया। संगीत और साहित्य की इन प्रस्तुतियों के माध्यम से देशप्रेम, सामाजिक चेतना और शहीदों के प्रति सम्मान के भाव व्यक्त किए गए।
भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान
कार्यक्रम में इप्टा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नगेंद्र जैन, एटक के राजकुमार बक्शी और जल आंदोलन के अनूप दायमा ने देश की वर्तमान परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं से भगत सिंह के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का जीवन और उनके विचार आज भी युवाओं को सामाजिक सरोकारों, जागरूकता और जिम्मेदारी के प्रति प्रेरित करते हैं।
साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में इतिहासकार हरिशंकर गोयल, सीटू के मोहन सिंह राघव, एटक के राजकुमार बक्शी, भारत परिवार के संयोजक वीरेंद्र क्रांतिकारी, मनीषा भारती, कवि किशन लाल खेरालिया, अशोक शर्मा, भूपेंद्र प्रधान, परमानंद, गोपाल तनेजा, महेंद्र बैरवा, इप्टा के अनिल नागर, नारायण मुटरेजा, भगवान सैनी और अखिलेश कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन इप्टा की महासचिव डॉ. सर्वेश जैन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के छायाचित्र और वीडियो रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी कादंबरी ने निभाई।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


