भरतपुर-डीग में निकाय चुनाव के प्रदर्शन को लेकर बढ़ा विवाद, प्रदेशाध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर सियासत तेज
जयपुर। राजस्थान की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भरतपुर राजपरिवार के सदस्य और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने आखिरकार कांग्रेस को अलविदा कह दिया है।https://www.facebook.com/share/p/19njhvFdRd/
लंबे समय से चल रही सियासी खींचतान और बयानबाजी के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर दी। अपने इस पोस्ट में उन्होंने पार्टी की रीति-नीतियों और चापलूसी की संस्कृति पर कड़ा प्रहार किया है।
अंतरात्मा की आवाज पर लिया फैसला
अध्यक्ष महोदय को संबोधित करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि उन्होंने जीवन में हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा, जिस पार्टी के लिए मैंने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया, यदि आज मेरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला मिला है, तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं। ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से बेहतर स्वाभिमान की मौत मरना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सच कहने से पीछे नहीं हटेंगे और किसी भी गलत या झूठे का साथ नहीं देंगे।
अपने पूर्वजों की परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने उसूलों और आदर्शों से कभी समझौता नहीं कर सकते, इसलिए कांग्रेस की गलत नीतियों के साथ कदमताल करना अब उनके लिए संभव नहीं है।
डोटासरा से तल्खी और निष्कासन की बन रही थी पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विश्वेंद्र सिंह के बीच जुबानी जंग चरम पर थी। विश्वेंद्र ने डोटासरा पर कई गंभीर और तीखे आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही यह माना जा रहा था कि वे पार्टी छोड़ने के मूड में हैं।
हालांकि, शुरुआती चर्चाओं के दौरान उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफे की बात से इनकार किया था। दूसरी ओर, डोटासरा पर किए गए तीखे हमलों के बाद पार्टी के भीतर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और निष्कासन लगभग तय माना जा रहा था। निष्कासन की इस गाज के गिरने से पहले ही विश्वेंद्र सिंह ने खुद इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
सीएम भजनलाल से बढ़ रही थीं नजदीकियां
राजस्थान की सियासत में पिछले कुछ महीनों से विश्वेंद्र सिंह के बदले राजनीतिक रुख की लगातार चर्चा थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म था।
भरतपुर के इन दोनों नेताओं के बीच लगातार संवाद और सीएम के प्रति विश्वेंद्र सिंह के सकारात्मक रुख ने उनके भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं को हवा दी थी।
कार्यकर्ताओं में आक्रोश और आगे की राह
अपनी पोस्ट में पूर्व मंत्री ने कहा कि तथाकथित नेताओं के अनर्गल बयानों और पार्टी में हावी चापलूसी की परंपरा से उनके कार्यकर्ता बेहद आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब है और उन्होंने अपने दामन पर कभी दाग नहीं लगने दिया। अपने समर्थकों और जनता को आश्वस्त करते हुए उन्होंने लिखा कि उनके खून की हर बूंद उनके क्षेत्रवासियों और कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित है।
विश्वेंद्र के इस बड़े कदम के बाद अब राजस्थान कांग्रेस में हड़कंप मच गया है।
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