जयपुर। सांगानेर क्षेत्र को यातायात जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड रोड परियोजना का काम बेहद सुस्त रफ्तार से चल रहा है। करीब 286.74 करोड़ रुपये की लागत वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रगति धीमी होने से तय समयसीमा में इसके पूरा होने पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।
धीमी गति और तय लक्ष्य का अंतर
जेडीए (JDA) द्वारा फरवरी 2026 में 286 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया गया था, जिसके तहत इस प्रोजेक्ट को 4 सितंबर 2028 तक यानी 30 महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
तय लक्ष्य: इस समयावधि के अनुसार हर महीने औसतन 9.56 करोड़ रुपये यानी प्रतिदिन लगभग 31.8 लाख रुपये का काम होना चाहिए।
मौजूदा स्थिति: पिछले छह महीनों में मार्च से अब तक केवल 12 करोड़ रुपये का ही काम हो पाया है। इस प्रकार प्रतिमाह औसतन 2 करोड़ रुपये और प्रतिदिन महज 6.66 लाख रुपये का काम हो रहा है, जो तय रफ्तार से लगभग पांच गुना कम है।
तीन हिस्सों में बंटा प्रोजेक्ट और अतिक्रमण की अड़चन
जेडीए ने इस पूरे निर्माण कार्य को तीन भागों में विभाजित किया है, जिनकी स्थिति इस प्रकार है:
पार्ट-ए (सांगानेर फ्लाईओवर से चौरड़िया पेट्रोल पंप): इस हिस्से में अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। यहां लगभग 1400 और 1140 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है। सड़क सीमा में 300 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें हटाए बिना मुख्य कॉरिडोर का काम शुरू होना संभव नहीं है।
पार्ट-बी (चौरड़िया पेट्रोल पंप से न्यू सांगानेर रोड): इस खंड पर निर्माण कार्य लगातार जारी है। यहां सड़क सीमा में लगभग 30 अतिक्रमण चिह्नित किए जाने हैं।
पार्ट-सी (चौरड़िया पेट्रोल पंप से मालपुरा गेट): इस हिस्से में 1400 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड का काम प्रगति पर है। यहां करीब 140 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं और सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के साथ वहां वाहन खड़े रहने से भी मुश्किलें आ रही हैं।
प्रशासन का पक्ष
परियोजना के एक्सईएन नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, शुरुआती दौर में यूटिलिटी शिफ्टिंग और यातायात सुचारू रखने के लिए रास्ता बनाने की वजह से काम की गति प्रभावित हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों हिस्सों पर एक साथ काम शुरू नहीं किया जा सकता है। पार्ट-ए में काम शुरू होने से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। प्रोजेक्ट के तहत कुल प्रस्तावित 666 में से अब तक 150 पायल्स और दो पीयर कैप का निर्माण पूरा हो चुका है और धीरे-धीरे काम की रफ्तार बढ़ाई जा रही है।


