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    EC मार्च से पहले CPI सांसद का बड़ा आरोप, बोले- CEC ने देश को गुमराह किया

    नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ आज विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा निकाले जाने वाले विरोध मार्च से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद पी. संदोष कुमार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसद विजय कुमार हंसदक ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार का कड़ा रुख

    सांसद पी. संदोष कुमार ने जानकारी दी कि आज सुबह लगभग 10:30 बजे संसद के मकर द्वार से शुरू होकर यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय तक पहुंचेगा। उन्होंने दावा किया कि 'इंडिया' ब्लॉक (INDIA Bloc) के लगभग सभी सांसद और कई प्रमुख विपक्षी नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे आंदोलन को और तीव्र करेंगे।

    • ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा: सीपीआई सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना ही होगा, इसमें अब कोई संदेह नहीं बचा है।

    • फॉर्म-6 में बदलाव और गुमराह करने का आरोप: सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने अपने बयान में दावा किया था कि फॉर्म-6 में संशोधन अदालत की अनुमति से किए गए थे। लेकिन सर्वोच्च अदालत के स्पष्टीकरण ने यह साबित कर दिया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश को गुमराह किया है, जो उनके खिलाफ एक बेहद गंभीर मामला है।

    • वोट चोरी से आगे बढ़ा विवाद: संदोष कुमार ने कहा कि विपक्ष पहले से ही 'वोट चोरी' के मुद्दों को उठा रहा था, और अब फॉर्म-6 में बिना मंजूरी के बदलाव का मामला विपक्ष के हाथों में एक और बड़ा हथियार बन गया है।

    जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक के तीखे आरोप

    दूसरी ओर, जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक ने चुनाव आयोग की भूमिका को लंबे समय से संदेह के घेरे में बताया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश में प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र का इस हद तक दुरुपयोग किया जाना और आम नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करना कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में चुनाव प्रक्रिया को इस तरह प्रभावित किया गया है, जिससे वह पूरी तरह सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में झुकती नजर आती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के हित में नहीं है।

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