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    सरकारी योजना का लालच, फर्जी APK और फिर बैंक खाता खाली; साइबर ठग पकड़ा गया

    कबीरधाम| कबीरधाम जिले में आरटीओ चालान, प्रधानमंत्री आवास योजना और विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी एपीके फाइल (APK file) भेजकर सीधे साधे लोगों के बैंक खातों को खाली करने वाले एक शातिर साइबर ठग को कबीरधाम साइबर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के झांसी से दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी मोबाइल फोन में फर्जी एपीके फाइल इंस्टॉल करवाकर बैंकिंग और यूपीआई (UPI) से जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेता था और उसके बाद खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देता था।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, दूसरे व्यक्ति के नाम से जारी सिम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इस मामले में पुलिस के हाथ अन्य आरोपियों की सुरागकशी भी लगी है और उनकी तलाश तेजी से की जा रही है।

    फर्जी एपीके के जाल में फंसकर लोगों ने गंवाए पैसे

    साइबर पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले महीने कुछ पीड़ितों ने थाने में यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बिना किसी जानकारी और सहमति के उनके बैंक खातों से यूपीआई के माध्यम से पैसे निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित कर लिए गए हैं। शिकायत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने इस मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी।

    बारीकी से की गई जांच में यह सामने आया कि दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः 1 लाख रुपये और 96,501 रुपये की ऑनलाइन साइबर ठगी की गई थी। जब पीड़ितों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच की गई, तो दोनों उपकरणों में आरटीओ चालान, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के नाम से भेजी गई संदिग्ध और फर्जी एपीके फाइलें मिलीं।

    पीड़ितों ने जानकारी के अभाव में इन लुभावनी फाइलों को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर स्थापित कर लिया था। पुलिस के मुताबिक, इसी रास्ते से साइबर ठगों तक पीड़ितों के बैंक खातों और यूपीआई से संबंधित संवेदनशील जानकारियां पहुंच गईं और ठगों ने आसानी से बैंक खातों से रकम पार कर दी।

    तकनीकी सुरागों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन से झांसी तक पहुंची पुलिस

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि विवेचना के दौरान पुलिस ने बैंक खातों के लेन-देन, तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच में मिले पुख्ता सुरागों के आधार पर मुख्य आरोपी सौरभ कुशवाहा (उम्र 24 वर्ष), पुत्र नरेंद्र कुशवाहा, निवासी करेरा, जिला शिवपुरी (मध्य प्रदेश) की पहचान सुनिश्चित की गई।

    इसके बाद कबीरधाम साइबर पुलिस की एक विशेष टीम उत्तर प्रदेश के झांसी पहुंची। अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपी को झांसी स्थित एक किराए के मकान से धर दबोचा।

    पूछताछ में कबूला जुर्म, पिछले दो महीनों में पांच शातिर गिरफ्तार

    पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपी ने फर्जी एपीके फाइल्स के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल कर ली है। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। आरोपी के पास से जप्त किए गए उपकरणों और दस्तावेजों की गहराई से जांच की जा रही है, तथा इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी टोह ली जा रही है।

    कबीरधाम जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ उनका अभियान लगातार जारी है। पिछले दो महीनों के भीतर ही पुलिस टीम ने पांच अलग-अलग मामलों में मुख्य साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

    पुलिस ने आम नागरिकों से एक बार फिर पुरजोर अपील की है कि किसी भी अनजान एपीके फाइल या संदेहास्पद लिंक को अपने मोबाइल में कभी भी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। इसके अलावा अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी और बैंकिंग पासवर्ड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कभी भी कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो वह तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएं।

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