समृद्ध भारत अभियान भरतपुर के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भरतपुर। उत्तर प्रदेश की तुलना में राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की अधिक कीमतों का सीधा असर राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा से लगे भरतपुर जिले के पेट्रोल पंप व्यवसाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पेट्रोल की कीमत में लगभग 10 रूपये प्रति लीटर और डीजल में करीब 3 रूपये प्रति लीटर के अंतर के कारण बड़ी संख्या में वाहन चालक एवं वाणिज्यिक वाहन उत्तर प्रदेश में ही ईंधन भरवा रहे हैं।
इस सम्बंध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पड़ोसी राज्यों के साथ अंतर कम करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष नीति पर विचार करने की मांग की है।
गुप्ता ने कहा कि मूल्य अंतर का सबसे अधिक असर भरतपुर के सीमावर्ती पेट्रोल पंपों पर दिखाई दे रहा है। कई पंपों का कारोबार बेहद प्रभावित हुआ है और कुछ बंद होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इसका असर केवल पेट्रोल पंप संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पंपों पर कार्यरत कर्मचारियों, ड्राइवरों, मैकेनिकों, ढाबों, दुकानदारों और अन्य छोटे व्यवसायों की आजीविका पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सीमा तक सड़क किनारे पेट्रोल पंप, ढाबे और दुकानें सक्रिय दिखाई देती हैं, जबकि राजस्थान में प्रवेश करते ही कई स्थानों पर आर्थिक गतिविधियां कमजोर और क्षेत्र वीरान नजर आता है। यह स्थिति केवल व्यापार का विषय नहीं, बल्कि रोजगार, राजस्व और सीमावर्ती अर्थव्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
गुप्ता ने कहा कि यदि राजस्थान में ईंधन लगातार महंगा रहता है तो अंतरराज्जीय एवं वाणिज्यिक वाहन राजस्थान में ईंधन भरवाने के बजाय पड़ोसी राज्यों का रुख करेंगे। इससे पेट्रोल-डीजल की बिक्री घटने के साथ राज्य के वैट राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं परिवहन लागत बढ़ने से स्थानीय व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
समृद्ध भारत अभियान के निदेशक ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है राजस्थान एवं पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तुलनात्मक समीक्षा कराई जाए तथा भरतपुर, धौलपुर, करौली सहित सीमावर्ती जिलों में पेट्रोल पंपों पर पड़े प्रभाव का सर्वे कराया जाए और पेट्रोल-डीजल पर वैट एवं कर संरचना की समीक्षा कर मूल्य अंतर कम किया जाए
गुप्ता ने कहा कि “राजस्थान में प्रवेश करते ही सीमावर्ती क्षेत्र वीरान और उजड़ा हुआ दिखाई दे, यह विकसित एवं समृद्ध राजस्थान की परिकल्पना के अनुरूप नहीं है।” उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए सरकार को इस विषय पर तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा करनी चाहिए।
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