खुले मैदान में दिन के समय हुआ नारद मोह लीला का मंचन, विष्णु के श्राप से जुड़ी रामावतार की कथा ने बांधा समां
कोटकासिम। राजस्थान में दिन के समय खुले मैदान में रामलीला मंचन की अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बुधवार को श्रीरामलीला मैदान में 138वीं रामलीला का शुभारंभ हुआ। कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र सोनी ‘लादू’ की अगुवाई और निर्देशक चतुर्भुज शर्मा के निर्देशन में शाम 4 बजे नारद मोह लीला का भव्य मंचन किया गया। पहले ही दिन कलाकारों ने भगवान विष्णु की माया और नारद मुनि के अभिमान से जुड़ी कथा का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को धार्मिक प्रसंग से जोड़ा।

तपस्या भंग करने में असफल रहे कामदेव
मीडिया प्रभारी योगेश अग्रवाल ने बताया कि नारद मुनि की तपस्या भंग करने के लिए इंद्रदेव ने कामदेव को भेजा था, लेकिन कामदेव नारद की तपस्या भंग करने में सफल नहीं हो सके।
तपस्या की सफलता के बाद नारद मुनि को अपनी विजय का अभिमान हो गया। उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समक्ष अपनी उपलब्धि का बखान किया। नारद के इसी अभिमान को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने माया रची।
विष्णु की माया में भ्रमित हुए नारद
माया के प्रभाव में नारद मुनि भ्रमित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को मनुष्य रूप में जन्म लेकर पत्नी के वियोग में वन-वन भटकने का श्राप दे दिया। भगवान विष्णु ने अपने प्रिय भक्त नारद का श्राप सहर्ष स्वीकार कर लिया।
माया समाप्त होने के बाद नारद मुनि को अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने भगवान विष्णु से क्षमा मांगी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने भक्त को क्षमा कर दिया। लीला के अंतिम दृश्य में मनु और शतरूपा ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप में प्राप्त करने का वरदान मांगा, जिसे भगवान ने स्वीकार कर लिया।
कलाकारों ने निभाई प्रमुख भूमिकाएं
नारद की भूमिका योगेश अग्रवाल, विष्णु की रवि सैनी, ब्रह्मा की उत्तम कौशिक और शंकर की दीपक रोहिल्ला ने निभाई। लक्ष्मी और विश्वमोहिनी की भूमिका संजय शर्मा ने निभाई।
वहीं कामदेव की भूमिका विशेष अग्रवाल, इंद्रदेव की ईशान्त बाघोरिया, शीलनिधि की पीयूष गुप्ता और कालियादूत की भूमिका योगेश ज्योतिषी ने निभाई। कलाकारों के अभिनय से रामलीला का पहला दिन धार्मिक भाव और उत्साह से भरा रहा।
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