मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने विद्यार्थियों के लिए छात्रावास व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। अब अलग-अलग समाजों के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाने के बजाय सभी समुदायों के विद्यार्थियों को एक ही साझा परिसर में रहने की आधुनिक और समावेशी सुविधा देने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
सामाजिक समरसता और बेहतर सुविधाओं पर जोर
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में जिलाधिकारियों को संयुक्त छात्रावासों के लिए जल्द से जल्द उपयुक्त जमीनों की तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने के साथ-साथ सामाजिक दूरियों को कम करना और उनमें आपसी भाईचारा व सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। इसके तहत जिलाधिकारियों को 13 अक्टूबर तक जमीन चयन के प्रस्ताव शासन को भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
संभाग स्तर पर 1,000 और जिला स्तर पर 500 विद्यार्थियों की क्षमता
प्रस्तावित योजना के अनुसार, संभागीय स्तर पर करीब 1,000 विद्यार्थियों की क्षमता वाले और जिला स्तर पर 500 विद्यार्थियों की क्षमता वाले विशाल संयुक्त छात्रावास बनाए जाएंगे। इन परिसरों में आदिवासी, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और मराठा सहित विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों के छात्र-छात्राएं एक साथ रहकर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों के बीच संवाद और आपसी समझ का दायरा और अधिक मजबूत होगा।
जमीन चयन के लिए तय किए गए कड़े मानक
मंत्री बावनकुले ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि छात्रावास के लिए जमीन का चयन केवल सरकारी भूमि उपलब्ध होने के आधार पर ही न किया जाए, बल्कि विद्यार्थियों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जमीन ऐसी जगह पर होनी चाहिए जहाँ से शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच आसान हो, सार्वजनिक परिवहन की सुगम व्यवस्था हो तथा आसपास अस्पताल, बाजार जैसी बुनियादी जरूरतें आसानी से उपलब्ध हों। इसके साथ ही भविष्य में छात्रावास के विस्तार की संभावनाओं का भी पूरा ध्यान रखने को कहा गया है।
महाज्योति छात्रावासों के लिए 11 जिलों पर विशेष फोकस
बैठक में 'महाज्योति' के माध्यम से प्रस्तावित छात्रावासों के निर्माण को लेकर चंद्रपुर, बीड, परभणी, धाराशिव, नांदेड, सांगली, सोलापुर, अकोला, यवतमाल, गोंदिया और वाशिम जिलों में भूमि उपलब्ध कराने के लिए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने को कहा गया है। इन प्रस्तावों में जमीन के क्षेत्रफल, लोकेशन, परिवहन और अन्य नागरिक सुविधाओं का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है। साथ ही जिन स्थानों पर जमीन तय होने के बावजूद प्रॉपर्टी कार्ड की प्रक्रिया लंबित है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कागजी कार्रवाई पूरी कर जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।


