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    सालों की सियासी अदावत खत्म? अमीन खान और फतेह खान के साथ आने से चर्चा तेज

    जयपुर। राजस्थान के मारवाड़ और बाड़मेर की राजनीति से एक बहुत बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है। जिन दो दिग्गज नेताओं को कभी एक-दूसरे का सबसे बड़ा सियासी प्रतिद्वंद्वी माना जाता था और जिनकी आपसी फूट व अंदरूनी कलह के कारण कांग्रेस पार्टी को अपनी पारंपरिक सीटों तक गंवानी पड़ी थी, वे अब आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर पूरी तरह एकजुट हो चुके हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही तस्वीर की सबसे ज्यादा चर्चा है, जिसमें दोनों नेता अपने सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक ही गाड़ी में सवार नजर आ रहे हैं।

    आपसी शीतयुद्ध समाप्त, एक मंच पर आए दिग्गज

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बाड़मेर और जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में कांग्रेस के भीतर चल रहा यह अंदरूनी शीतयुद्ध अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। बीजराड़ मंडल कांग्रेस की एक अहम बैठक के बाद बाड़मेर से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने एक बड़े सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए पूर्व मंत्री अमीन खान और पूर्व जिला अध्यक्ष फतेह खान को एक ही वाहन में बिठाया और सीधे फतेह खान के आवास पर पहुंचे। वहाँ सभी नेताओं ने साथ बैठकर भोजन किया और आपसी तल्खियों को भुलाकर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर खुलकर चर्चा की। इस अप्रत्याशित और मजबूत सुलह के बाद से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते हुए नजर आ रहे हैं।

    क्या थी दोनों नेताओं के बीच पुरानी खटास?

    अमीन खान और फतेह खान के बीच की राजनीतिक दुश्मनी का इतिहास काफी पुराना और चर्चित रहा है, जिसकी शुरुआत मुख्य रूप से वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान हुई थी:

    • शिव विधानसभा सीट का दंगल: साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने शिव विधानसभा सीट से अपने अनुभवी नेता अमीन खान को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था।

    • फतेह खान की बगावत: पार्टी द्वारा टिकट न मिलने से नाराज तत्कालीन कांग्रेस जिला अध्यक्ष फतेह खान ने बगावत का बिगुल फूंक दिया और बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में कूद पड़े।

    • वोटों का भारी बिखराव और हार: इन दोनों नेताओं के बीच चली इस प्रतिष्ठा की लड़ाई और वोटों के भारी ध्रुवीकरण का सीधा फायदा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे रविंद्र सिंह भाटी को मिला, और वे चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इस हार के बाद से दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक दूरियां बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं।

    आगामी चुनावों के मद्देनजर क्यों पड़ी इस एकता की जरूरत?

    सूबे में पंचायती राज और स्थानीय निकाय के चुनाव अब बेहद नजदीक आ चुके हैं। बाड़मेर और जैसलमेर के ग्रामीण अंचलों, विशेषकर शिव विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या और उनका प्रभाव हार-जीत में सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है। अमीन खान और फतेह खान दोनों का ही इस वर्ग पर मजबूत जनाधार और गहरा प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि चुनावी रण में उतरने से पहले दोनों नेताओं का एक होना कांग्रेस पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी राहत और संजीवनी साबित हो सकता है।

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