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    बहरोड़ में फिर मिला दुर्लभ पैंगोलिन, नाखून गायब मिलने से बढ़ा शक

    खरखड़ा गांव में सर्प मित्र कृष्ण यादव ने किया पैंगोलिन का रेस्क्यू, जैनपुरबास से कोबरा सांप को भी सुरक्षित निकाला

    बहरोड़। क्षेत्र में एक बार फिर दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन मिलने का मामला सामने आया है। खरखड़ा गांव में मिले इस जीव का सर्प मित्र कृष्ण यादव ने रेस्क्यू किया। पैंगोलिन के चारों पैरों के नाखून गायब मिलने पर तस्करी की आशंका जताई गई है। हालांकि, इस आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी दौरान जैनपुरबास क्षेत्र से एक कोबरा सांप का भी रेस्क्यू किया गया।

    दूसरी बार पैंगोलिन का रेस्क्यू

    सर्प मित्र कृष्ण यादव के अनुसार, खरखड़ा गांव में मिले पैंगोलिन को सुरक्षित निकालकर राजकीय पशु चिकित्सालय ले जाया गया। वहां चिकित्सकों की टीम ने उसे प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद वन विभाग को सौंप दिया गया।

    कृष्ण यादव ने बताया कि पैंगोलिन बेहद दुर्लभ वन्यजीव है। उनके अनुसार, इससे पहले भी बहरोड़ क्षेत्र के भांवता की ढाणी में ऐसा जीव मिल चुका है। अब दूसरी बार पैंगोलिन का रेस्क्यू किए जाने से क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

    चारों पैरों के नाखून गायब, तस्करी की आशंका

    कृष्ण यादव ने बताया कि पैंगोलिन के चारों पैरों के नाखून गायब मिले। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने आशंका जताई कि जीव को कहीं से तस्करी कर लाया गया होगा और नाखून काटने के बाद छोड़ दिया गया होगा। हालांकि, जीव के यहां पहुंचने और उसके नाखून गायब होने के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पैंगोलिन एक संरक्षित और दुर्लभ वन्यजीव है। इसके अवैध शिकार और तस्करी की आशंका को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे में इस मामले में वन विभाग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    कोबरा और पैंगोलिन को जंगल में छोड़ा

    जानकारी के अनुसार, जैनपुरबास से रेस्क्यू किए गए कोबरा सांप और पैंगोलिन को वन विभाग तथा कृष्ण यादव की मदद से ढिंढोर के जंगल में छोड़ा गया। रेस्क्यू के दौरान दोनों जीवों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कार्रवाई की गई।

    इस घटना ने एक बार फिर दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और संभावित तस्करी पर सवाल खड़े किए हैं। पैंगोलिन के नाखून गायब मिलने के मामले में वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

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