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    CM मोहन यादव से चर्चा के बाद पटवारियों का बड़ा फैसला, आंदोलन खत्म कर काम शुरू करने पर सहमति

    भोपाल: मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के संचालन को लेकर पटवारी संघ और राज्य सरकार के बीच पिछले काफी समय से चल रहा गतिरोध और विवाद अब पूरी तरह से सुलझ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार की शाम को हुई एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने आगामी 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का कार्य फिर से सुचारू रूप से शुरू करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पटवारियों की शारीरिक सुरक्षा, हालिया विभागीय कार्रवाइयों और उनकी लंबित आर्थिक मांगों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद शासन और संघ के बीच सभी बिंदुओं पर पूर्ण सहमति बन गई है।

    पटवारियों को न्यायिक संरक्षण और आदेश जारी करने पर बनी सहमति

    पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले सभी पटवारियों को पर्याप्त न्यायिक संरक्षण प्रदान करने के लिए जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही, गत 17 सितंबर के बाद से पटवारियों के खिलाफ की गई सभी विभागीय कार्रवाइयों को पूर्ण रूप से निरस्त किए जाने पर भी सहमति बन गई है। सरकार के इन आश्वासनों और फैसलों के बाद संघ ने हड़ताल समाप्त कर अपने काम पर वापस लौटने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।

    27 अक्टूबर को महासम्मेलन में हो सकती है आर्थिक मांगों को लेकर घोषणा

    पटवारियों की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति और अन्य प्रमुख आर्थिक मांगों को लेकर भी इस बैठक में गंभीर मंथन किया गया। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के अनुसार, राज्य सरकार ने इन सभी मांगों के प्रति बेहद सकारात्मक रुख दिखाया है। वेतन विसंगति के जटिल मुद्दे पर एक विशेष आयोग के गठन के बाद ही आगे विचार किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी 27 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विशाल महासम्मेलन के दौरान पटवारियों की इन सभी आर्थिक मांगों के संबंध में एक बड़ी आधिकारिक घोषणा करने का पूर्ण आश्वासन दिया है।

    रजिस्ट्रियों के विवाद और कानूनी सुरक्षा को लेकर थी मुख्य मांग

    वास्तव में, पटवारी संघ स्वामित्व योजना के तहत की जाने वाली जमीनों की रजिस्ट्रियों से जुड़े मामलों में पुख्ता कानूनी सुरक्षा की माँग लगातार उठा रहा था। पटवारियों के मन में यह गहरी आशंका थी कि जमीनों के पंजीयन और नामांतरण से संबंधित कोई भी विवाद सामने आने पर उन्हें बेवजह कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर पूरे राज्य में इस योजना का काम काफी प्रभावित हो रहा था। कुलदीप सिंह गुर्जर ने बताया कि राज्य सरकार ने इस संबंध में जमीनी स्तर पर आ रही सभी तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान करने और पटवारियों को आवश्यक कानूनी संरक्षण के प्रावधान सुनिश्चित करने पर अपनी सहमति जता दी है।

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया के जरिए दी बैठक की जानकारी

    इस उच्चस्तरीय बैठक के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से भी आधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई है। इसमें यह स्पष्ट रूप से बताया गया कि पटवारी संघ के सभी प्रमुख पदाधिकारियों ने स्वामित्व योजना के कार्य को पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और तत्परता के साथ आगे बढ़ाने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जताई है। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है, और इसके तहत पूरे राज्य में लगभग 50 लाख भूमि पंजीयन (प्रॉपर्टी कार्ड वितरण) का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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