रायपुर: देश के अन्य हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी सरकारी स्कूलों के जर्जर और खतरनाक हो चुके भवनों के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक निजी भवनों और अन्य स्कूलों में संचालित की जा रही है। वर्तमान में अकेले रायपुर शहर में ऐसे लगभग 11 स्कूल हैं जो जर्जर भवनों के चलते अन्यत्र शिफ्ट किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय विधायकों द्वारा स्पष्ट अनुशंसा पत्र दिए जाने के बावजूद कई जर्जर स्कूलों को अब तक डिस्मेंटल (ध्वस्त) तक नहीं कराया जा सका है। उदाहरण के लिए, गुरुघासीदास नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का संचालन पिछले लगभग दो साल से एक निजी स्कूल के भवन में किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विधायक द्वारा विधिवत पत्र दिए जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों में इस जर्जर सरकारी स्कूल के मूल भवन को गिराया नहीं गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वैकल्पिक संचालन के एवज में संबंधित स्कूल के लिए एक शिक्षक द्वारा अपने स्तर पर 30 हजार रुपये का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, जब इस संबंध में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो उन्हें इस वित्तीय लेनदेन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं होने की बात कही गई। जानकारों का यह भी कहना है कि इस स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए शासन स्तर से फंड पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद नए भवन के निर्माण और पुराने जर्जर ढांचे को हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
विधायक के कड़े पत्र के बाद भी जस की तस बनी हुई है स्थिति
शासकीय प्राथमिक शाला गुरुघासीदास नगर के जर्जर भवन को लेकर स्थानीय विधायक राजेश मूणत ने करीब दो साल पहले रायपुर कलेक्टर को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में भवन को 24 घंटे के भीतर डिस्मेंटल कराने और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। इस पत्र के कुछ ही दिनों बाद स्कूल के ठीक सामने स्थित एक निजी स्कूल ने विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अपने परिसर में जगह देने पर सहमति जता दी थी, जिसके बाद से कक्षाएं वहीं संचालित हो रही हैं। तब से स्कूल का संचालन लगातार वैकल्पिक भवन में हो रहा है, लेकिन मूल जर्जर स्कूल भवन को डिस्मेंटल करने की प्रशासनिक कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है।
राजधानी रायपुर में 134 स्कूलों के 394 से अधिक भवन हैं जर्जर
आंकड़ों के मुताबिक रायपुर जिले में कुल 134 स्कूलों के 394 से ज्यादा भवन पूरी तरह से जर्जर और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में बताए जा रहे हैं। इनमें भी ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय स्कूलों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक और खतरनाक बनी हुई है। इन जर्जर परिसरों में कई ऐसे स्कूल शामिल हैं जहाँ 8 से 10 कक्षाओं के कमरों को तुरंत डिस्मेंटल किया जाना आवश्यक है। इनमें से इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़कर बाकी अधिकांश जर्जर स्कूलों में अभी भी विद्यार्थियों की कक्षाएं जोखिम के बीच लग रही हैं। राज्य में आए दिन जर्जर भवनों के ढहने और मासूम विद्यार्थियों के घायल होने की हृदयविदारक घटनाएं सामने आ रही हैं, इसके बावजूद राजधानी में ही स्कूलों की इस बदहाल स्थिति को सुधारने के प्रति गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
किराए के भुगतान और वैकल्पिक व्यवस्था पर खड़े हो रहे हैं सवाल
स्कूल के वैकल्पिक संचालन के लिए सालाना 30 हजार रुपये का किराया दिए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को इस व्यवस्था की कोई जानकारी न होने की बात हैरान करने वाली है। इससे स्कूल के वैकल्पिक संचालन और उसके भुगतान की पूरी वित्तीय व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। विभागीय पत्राचार में भी इस किराए के भुगतान को लेकर कोई आधिकारिक उल्लेख नहीं मिलता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि पिछले दो सालों से स्कूल को मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग ही इस किराए के भुगतान के रूप में किया जा रहा है।
निरीक्षण पूरा होने के बावजूद अधिकारियों की उदासीनता से पेंडिंग हैं कार्य
जानकारों के अनुसार, खतरनाक और जर्जर हो चुके भवनों को चिन्हित कर उन्हें डिस्मेंटल कराने के लिए रायपुर के कई स्कूलों का तकनीकी निरीक्षण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। नियमों के तहत स्कूलों में डिस्मेंटल कराने का कार्य अलग-अलग नगर निगम जोन कार्यालयों को आवंटित किया गया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों की भारी उदासीनता और कार्य के प्रति रुचि न लेने के कारण ये सभी महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से पेंडिंग पड़े हुए हैं। संबंधित जोन कमिश्नरों को इस पूरी स्थिति की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद जर्जर भवनों को गिराने और नए भवनों के निर्माण की दिशा में कोई प्रगति नहीं हो रही है।
इस पूरे मामले पर रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एमजी सतीश कुमार का कहना है कि शासन स्तर से हाल ही में जर्जर स्कूलों की अद्यतन जानकारी मांगी गई है। उनका यह भी दावा है कि रायपुर में वर्तमान में कोई भी शासकीय स्कूल किराए के भवन में संचालित नहीं हो रहा है, बल्कि सभी स्कूल सुरक्षित वैकल्पिक भवनों में ही संचालित किए जा रहे हैं।


