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    रीवा के अस्पताल में महिला की मौत से हड़कंप, डॉक्टर पर फिर लगे गंभीर आरोप

    रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत अजगरहा रोड पर स्थित एक किराए के मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से एक महिला की जलकर दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की पहचान तिलखन निवासी मिथिलेश सिंह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से गहन छानबीन कर रही है।

    आग लगने की घटना और पुलिस की कार्रवाई

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 9 और 10 अक्टूबर की दरमियानी रात की है। किराए के मकान से अचानक धुआं निकलता देख पड़ोसियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। मौके पर पहुँची टीम ने देखा कि मकान का दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था। इसके बाद कटर की मदद से दरवाजा काटकर महिला को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस द्वारा महिला के द्वारा खुद आग लगाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में लगाए गए थे गंभीर आरोप

    इस पूरी घटना के सामने आने के बाद मृतका द्वारा प्रशासन को दिया गया एक पुराना ज्ञापन चर्चा का केंद्र बन गया है। मृतका मिथिलेश सिंह ने अपनी मौत से ठीक 18 दिन पहले, यानी 24 सितंबर को जिला कलेक्टर कार्यालय में एक लिखित ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में उन्होंने संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ डॉ. शुभम मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का कहना था कि करीब 10 महीने पहले डॉक्टर ने उसके कंधे का ऑपरेशन किया था, जिसमें नट-बोल्ट, रॉड और प्लेट डाली गई थी, लेकिन इस सर्जरी के बाद दर्द कम होने के बजाय लगातार बढ़ता चला गया।

    पैसों की मांग और आत्महत्या की चेतावनी

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि जब वह दोबारा इलाज के लिए अस्पताल पहुँची, तो उससे 50 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें 40 हजार रुपये बेहतर गुणवत्ता की रॉड-प्लेट के लिए और 10 हजार रुपये डॉक्टर के लिए मांगे जा रहे थे। उसने आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इलाज की गुहार लगाई थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह इलाज कराने में असमर्थ थी। इस मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि महिला ने अपने उस ज्ञापन में चेतावनी दी थी कि यदि उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाएगी। ज्ञापन सौंपने के ठीक 18 दिन बाद आग से जलकर उसकी मौत होने से इस पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पुलिस हर एंगल से इसकी जाँच कर रही है।

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