इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर समेत पूरे मालवा-निमाड़ अंचल में कम बारिश के चलते जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। मानसून की विदाई के तुरंत बाद ही यशवंत सागर सहित प्रमुख जलाशयों में जलस्तर क्षमता से काफी कम दर्ज किया गया है, जिससे शहर की लगभग 40 लाख की आबादी के समक्ष पेयजल उपलब्धता को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
कैबिनेट मंत्री ने दिए जल संरक्षण के व्यावहारिक सुझाव
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के पितृ पर्वत से एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर नागरिकों को आने वाली गर्मियों के लिए सतर्क किया है। उन्होंने बताया कि अंचल में सामान्यतः 37 से 40 इंच बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष औसत केवल 20 से 21 इंच ही बारिश हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने आम जनता से दैनिक दिनचर्या में बदलाव लाकर पानी बचाने की अपील की है।
आरओ वाटर का सही उपयोग: घरों में आरओ सिस्टम से निकलने वाले वेस्ट वाटर (व्यर्थ पानी) को फेंकने के बजाय उसका इस्तेमाल पोछा लगाने और साफ-सफाई में करने की सलाह दी गई।
ओवरफ्लो पर नियंत्रण: पानी की टंकियों से अक्सर 20-25 लीटर पानी बहकर बर्बाद हो जाता है, जिससे बचने के लिए टंकियों में वाटर अलार्म लगाने का सुझाव दिया।
शावर की जगह बाल्टी का इस्तेमाल: शावर से नहाने में लगभग 200 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी का प्रयोग कर 25 से 30 लीटर में ही स्नान किया जा सकता है।
घरेलू कार्यों में सावधानी: बर्तन और कपड़े धोते समय नल को निरंतर खुला न छोड़कर बाल्टी में पानी लेकर इस्तेमाल करने का आग्रह किया गया।
परिवार के साथ 'वाटर चार्ट' बनाने की अपील
कैबिनेट मंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे नवरात्रि के दौरान जल संरक्षण का संकल्प लें और अपने परिवार के साथ बैठकर एक 'वाटर चार्ट' तैयार करें। इस चार्ट के माध्यम से दैनिक कार्यों में कम से कम पानी के उपयोग का नियम तय किया जाए, ताकि आने वाले समय में संभावित गंभीर जल संकट से शहर को बचाया जा सके।


