More
    Homeराजनीतिगहलोत ने पीएम मोदी का पुराना भाषण साझा कर पूछा- आज वही...

    गहलोत ने पीएम मोदी का पुराना भाषण साझा कर पूछा- आज वही मांग अराजकता कैसे?

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इन दिनों देश की सियासत गरमाई हुई है और राजनीतिक तनाव तथा विरोध-प्रदर्शनों का माहौल बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर के साथ-साथ कोलकाता और मुंबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दल, छात्र संगठन और तमाम समूह लगातार धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुराना भाषण साझा करते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

    पीएम मोदी के पुराने बयानों का किया जिक्र

    अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रधानमंत्री मोदी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि 6 जून 2011 का नरेंद्र मोदी का यह भाषण देश के हर नागरिक को सुनना चाहिए, जिसमें वे यह कहते नजर आ रहे हैं कि यदि उनके हाथ बंधे न होते, तो वे केंद्र सरकार के खिलाफ खुली लड़ाई छेड़ देते। गहलोत ने इसे अराजकता की पराकाष्ठा करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने 20 दिसंबर 2013 के एक अन्य बयान का हवाला देते हुए कहा कि तब मोदी ने जनता से कहा था कि वह केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आक्रामक हो रही है। गहलोत ने सवाल उठाया कि यूपीए सरकार के खिलाफ ऐसे भड़काऊ बयान देने वाले नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी आज विपक्ष तथा युवाओं के लोकतांत्रिक आंदोलनों को अराजकता क्यों बता रही है।

    पुराने आंदोलनों की दिलाई याद और भाजपा पर बौखलाहट का आरोप

    कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि एसआईआर में हुई कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों से भाजपा पूरी तरह बौखलाई हुई है। अपनी गलतियां स्वीकार करने और देश के सामने सच्चाई रखने के बजाय भाजपा नेता लगातार विपक्ष और युवाओं पर हमले करने में जुटे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2014 से पहले अन्ना हजारे का लोकपाल आंदोलन, बाबा रामदेव का कालाधन विरोधी आंदोलन और 2जी व कोलगेट जैसे मुद्दों पर सड़कों पर बड़े प्रदर्शन किए गए थे, जिनमें लाखों लोगों की भीड़ जुटाई गई थी। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि आज न तो अन्ना हजारे के लोकपाल का कोई पता है और न ही रामदेव कालेधन पर कुछ बोल रहे हैं, जबकि 2जी और कोलगेट जैसे तमाम आरोप अदालत द्वारा खारिज किए जा चुके हैं।

    असहमति का सम्मान ही लोकतंत्र का मूल आधार

    अशोक गहलोत ने सवाल किया कि क्या 2014 से पहले नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेता इन्हीं सब आधारों पर सत्ता में बदलाव की मांग नहीं कर रहे थे? उन्होंने कहा कि तब किया गया वह विरोध लोकतंत्र था और आज वही मांग उनके लिए अराजकता कैसे बन गई? आज देश का युवा अपने रोजगार, भविष्य और अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहा है, और सरकार द्वारा उसकी इस आवाज को अराजकता करार देना युवाओं की चिंताओं का सीधा अपमान है। उन्होंने कहा कि जिस वैचारिक पृष्ठभूमि से भाजपा आती है, उसे शायद यह बात कभी समझ नहीं आएगी कि असहमति का सम्मान करना ही सच्चे लोकतंत्र का मूल आधार होता है।

    सवाल पूछने वालों पर आरोप मढ़ना घबराहट की निशानी

    अपने बयान के अंत में अशोक गहलोत ने कहा कि आज विपक्ष जो तीखे सवाल उठा रहा है, वही सवाल देश के करोड़ों आम नागरिकों के मन में भी घर कर चुके हैं। जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जनता का भरोसा डगमगाने लगा हो, तब जनता को संतोषजनक जवाब देने के बजाय उलटे सवाल पूछने वालों पर ही आरोप मढ़ना सीधे तौर पर भाजपा की बढ़ती घबराहट को उजागर करता है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here