आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में नवग्रह जाप अनुष्ठान की पूर्णाहुति एवं अणुव्रत संस्कार कल
भीलवाड़ा। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में बुधवार 21 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक सूर्यमहल में जीवन जीने की कला पर मंगल दिव्य देशना का आयोजन होगा।
इस अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना प्राप्त होगी। इस दौरान प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन होगा। नवरात्रि में आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में आयोजित सौभाग्य संवर्धक महोत्सव भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान की पूर्णाहुति विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को होगी।
इस अवसर पर श्रावक श्राविकाएं आचार्यश्री से अणुव्रत संस्कार भी ग्रहण करेंगे। श्रद्धा एवं भक्ति से ओतप्रोत माहौल में हो रहे इस आयोजन में सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं अपने भाग्यांक, मूलांक या नामांक के आधार पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अनुष्ठान में शामिल हो रहे है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि अनुष्ठान के तहत सोमवार को भाग्यांक सात एवं केतु ग्रह था उन श्रावक श्राविकाओं द्वारा अनुष्ठान सम्पन्न किया गया। विजयादशमी पर पूर्णाहुति हवन के सामूहिक अनुष्ठान में उन श्रावक श्राविकाओं को भी शामिल होने का सुअवसर मिलेगा जो किसी भी कारण से अब तक इसमें शामिल नहीं हो पाए। सभी को उनके भाग्यांक एवं ग्रह के अनुसार वस्त्र प्रदान किए जाएंगे।
सौभाग्य संवर्धक महोत्सव के समापन पर भाग्यांक एक से नौ नंबर तक के पुण्यार्जक जिन्होंने नवग्रह अनुष्ठान में भाग लिया उनका सामूहिक निष्ठापन अनुष्ठान होगा। इसके लिए अभिमंत्रित माला भी प्रदान की जाएगी। पूर्णाहुति अनुष्ठान के लिए करीब 100 हवन कुण्ड बनेंगे एवं नवग्रह की आहुतियां होगी।
विजयादशमी के इस पावन अवसर पर आचार्यश्री के सानिध्य में अणुव्रत संस्कार का भव्य आयोजन होगा। इसमें श्रावक-श्राविकाएं अपनी-अपनी भावनानुसार गुरूदेव से छोटे-छोटे व्रत स्वीकार कर जीवन को पवित्र व पावन बनाएंगे। इन व्रतों में नियमित जिनेन्द्र भगवान की आराधना,रात्रि भोजन त्याग, जमीकंद का त्याग, नियमित मंदिर जाकर अभिषेक करना जैसे छोटे-छोटे अणुव्रत स्वीकार करने होंगे।
श्रीपुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने अधिकाधिक श्रावक श्राविकाओं से अनुष्ठान पूर्णाहुति का साक्षी बनने के साथ जीवन को सुखद बनाने के लिए अपनी क्षमता व भावना अनुसार आचार्यश्री से अणुव्रत स्वीकार करने की अपील की है।
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