भक्तिमय माहौल में हुआ पूजन, प्रसाद और उपहार बांटे; बेटियों को सम्मान, शिक्षा व सुरक्षा देने का दिया संदेश
अजमेर। ताराचंद हुंदलदास खानचंदानी सेवा संस्था द्वारा संचालित श्री अमरापुर सेवाघर वृद्धाश्रम, प्रगति नगर, अजमेर में कन्या पूजन कार्यक्रम हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आश्रम के वृद्धजनों, ट्रस्टियों और स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें प्रसाद वितरित किया गया। कन्याओं के साथ डांडिया नृत्य कर उपस्थित लोगों ने माता रानी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और सभी के सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
पूजन के साथ डांडिया नृत्य ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान कन्याओं का सम्मानपूर्वक पूजन किया गया और उन्हें प्रसाद व उपहार भेंट किए गए। धार्मिक आस्था और सेवा भावना से जुड़े इस आयोजन में आश्रम के वृद्धजनों ने आनंदपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम से आश्रम का वातावरण उल्लास और अपनत्व से भर गया।
कन्या पूजन नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक
संस्था से जुड़े हरी चंदनानी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नारी शक्ति, पवित्रता, प्रेम और करुणा के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बेटियां घर की खुशियां, समाज की शक्ति और देश का भविष्य हैं। कन्या पूजन की सार्थकता तभी है, जब बेटियों को जीवन में समान सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं। समाज को बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।
दत्ता परिवार ने किया आयोजन में सहयोग
इस पुनीत आयोजन में ट्रस्टी हरी चंदनानी, रमेश टिलवानी और चंद्र नोतानी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के संपूर्ण खर्च, प्रसादी और उपहार की व्यवस्था दत्ता परिवार की ओर से की गई। आश्रम के सदस्यों और वृद्धजनों ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा माता रानी से सभी के जीवन में सुख, शांति, खुशहाली और उन्नति की प्रार्थना की।
वृद्धजनों को परिवार जैसा वातावरण देना उद्देश्य
हरी चंदनानी ने बताया कि संस्था की ओर से वृद्धाश्रम में त्योहारों और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, ताकि यहां रहने वाले बुजुर्गों को अपनापन, सम्मान और परिवार जैसा वातावरण मिल सके। संस्था का उद्देश्य है कि जीवन के इस पड़ाव पर कोई भी बुजुर्ग खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे। आश्रम के ट्रस्टी यहां रहने वाले बुजुर्गों की अपने माता-पिता की तरह सेवा करने का प्रयास करते हैं।
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