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    पंडाल हादसे की जांच अब राज्य सरकार के हाथ में, हाई कोर्ट ने निगरानी से किया इनकार

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार के पास इस दुर्घटना की तह तक जाने के लिए एक जांच आयोग गठित करने का पूरा अधिकार है, जिसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज द्वारा की जा सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी नहीं करेगा, और आयोग की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करने का अंतिम निर्णय पूरी तरह से राज्य सरकार का होगा।

    मौजूदा जजों की कमी और खंडपीठ का निर्देश

    मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने इस दर्दनाक घटना से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। दरअसल, राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर जांच आयोग की अध्यक्षता करने के लिए किसी वर्तमान जज की सेवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके जवाब में खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आयोग में किसी मौजूदा जज की नियुक्ति का फैसला पूरी तरह से मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने न्यायपालिका पर काम के भारी बोझ और जजों की कमी का हवाला देते हुए बताया कि स्वीकृत 72 पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 50 जज ही कार्यरत हैं, और आने वाले महीनों में यह संख्या और घटने वाली है। ऐसी स्थिति में यदि कोई वर्तमान जज उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो राज्य सरकार 'जांच आयोग अधिनियम, 1952' के तहत किसी सेवानिवृत्त जज को इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त कर सकती है।

    याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए भगदड़ के मुख्य कारण

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता तापस कुमार डे की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत के समक्ष भगदड़ के पीछे के तमाम मुख्य कारणों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पंडाल में प्रवेश के लिए बेहद संकरे रास्तों का इस्तेमाल किया जाना, सुरक्षा और प्रबंधन के लिए बिना किसी विधिवत प्रशिक्षण वाली समितियों को कमान सौंपना, वेंटिलेशन की बेहद खराब व्यवस्था और नाकाफी रोशनी होने के कारण वहां अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इसके ऊपर से अचानक हुई भारी बारिश ने हालात को पूरी तरह से बेकाबू कर दिया, जबकि दूसरी तरफ पुलिस बल की कमी और प्रशासनिक कुप्रबंधन ने इस पूरी त्रासदी को और अधिक भयावह बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह दुखद भगदड़ मच गई।

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