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    जिस महुआ से बनती थी शराब, अब उसी के लड्डुओं की देश-विदेश में बढ़ी डिमांड

    सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ग्रामीण महिलाओं ने अपनी लगन और सूझबूझ से एक अनूठी मिसाल कायम की है। जिस महुआ के फूलों का उपयोग अब तक ग्रामीण अंचलों में मुख्य रूप से पारंपरिक पेय अथवा शराब बनाने तक सीमित माना जाता था, वही अब यहाँ की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए स्वावलंबन और आर्थिक तरक्की का मुख्य जरिया बन चुका है। स्थानीय महिलाएं महुआ के फूलों से पौष्टिक लड्डू, स्वादिष्ट अचार और अन्य खाद्य सामग्री तैयार कर रही हैं, जिनकी बढ़ती मांग अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर सात समुंदर पार इंग्लैंड तक पहुँच चुकी है।

    पारंपरिक वन उपज से आजीविका का नया जरिया

    सीधी जिले के जंगलों में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले महुआ के पेड़ों से मिलने वाले फूलों को एकत्र कर महिलाओं ने इससे तरह-तरह के खाद्य उत्पाद बनाने की शुरुआत की है। सीधी शहर में संचालित हर्बल कैफे तथा वन धन उत्पाद केंद्रों की मदद से इन तैयार सामग्रियों को न केवल उचित बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि महिलाओं को पैकेजिंग और बिक्री का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस पूरी पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर दिए हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ रहा है।

    महुआ के पौष्टिक लड्डू बनाने की अनूठी विधि

    हर्बल कैफे में कार्यरत कर्मचारियों और स्व-सहायता समूह की सदस्यों के अनुसार महुआ के फूल प्राकृतिक रूप से काफी मीठे और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। लड्डू तैयार करने के लिए सबसे पहले जंगलों से लाए गए सूखे महुआ के फूलों की अच्छे से सफाई की जाती है और फिर उन्हें शुद्ध देसी घी में पकाया जाता है। इसके पश्चात स्वाद और पौष्टिकता में इजाफा करने के लिए इसमें गुड़, तिल, भुनी हुई मूंगफली, सूखा नारियल और विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे मिलाए जाते हैं। यह उत्पाद न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद गुणकारी माना जाता है।

    भोपाल से लेकर सात समुंदर पार तक बढ़ी मांग

    वन विभाग के प्रशासनिक सहयोग और मार्गदर्शन से संचालित केंद्रों के माध्यम से इन जैविक व प्राकृतिक उत्पादों को एक बड़ा बाजार मिल रहा है। सीधी जिले की महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित इन उत्पादों का स्वाद अब राज्यीय सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पसंद किया जाने लगा है। स्थानीय वन संसाधनों के इस नए और अनूठे प्रयोग ने यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने हुनर के दम पर अपनी एक अलग पहचान बना सकती हैं।

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