रायपुर। निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और घटाने के दौरान हो रही भारी गड़बड़ियों के बीच अब छत्तीसगढ़ की राजधानी में एक हैरान कर देने वाला प्रशासनिक मामला सामने आया है। यहां निर्वाचन पोर्टल पर मतदाता के लिंग श्रेणी में त्रुटि करते हुए एक महिला जनप्रतिनिधि को दस्तावेज़ों में पुरुष दर्ज कर दिया गया है। यह लापरवाही किसी आम नागरिक के साथ नहीं, बल्कि बीरगांव की पूर्व महापौर के साथ हुई है।
दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि और प्रशासनिक चूक
चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार पूर्व महापौर अंबिका यदु के संबंध में उम्र, पारिवारिक जानकारी और संसदीय क्षेत्र जैसे तमाम मुख्य विवरण सही दर्ज किए गए हैं, परंतु जेंडर के स्तंभ में महिला के स्थान पर पुरुष अंकित कर दिया गया है। डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक हुई इस बड़ी चूक के सामने आने के बाद निर्वाचन संबंधी सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।
बीएलओ की कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों को घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करने और सटीक जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर इस प्रकार की आधारभूत गलतियों का सामने आना बीएलओ और संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही को उजागर करता है। इस घटनाक्रम के बाद से न केवल आम मतदाताओं बल्कि राजनीतिक हस्तियों के विवरणों में भी बड़े पैमाने पर अंतर मिलने की शिकायतें बढ़ गई हैं।


