कीव। यूक्रेन के युद्ध के मैदान से इंसान की जीजीविषा और अटूट हौसले की एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। यूक्रेन के 49 वर्षीय सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको ने करीब आठ महीनों तक एक वीरान स्कूल के बॉयलर के नीचे बने गड्ढे में अकेले रहकर मौत को मात दी। एक रूसी ड्रोन हमले में पैर में गंभीर चोट लगने और इलाज न मिल पाने के कारण जब उनका पैर सड़ने लगा, तो उन्होंने खुद ही एक ईंट पर पैर रखकर चाकू से उसे काटकर अलग कर दिया। क्रिवी रिह के रहने वाले व्लासेंको यूक्रेन की 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड में तैनात हैं।
ड्रोन हमले में साथी की मौत और खुद हुए गंभीर घायल
व्लासेंको को फ्रंट-लाइन पोस्ट पर भेजा गया था, जहाँ वे अपने साथी बास्की के साथ एक खाली पड़े स्कूल में रह रहे थे। 16 फरवरी को जब दोनों राशन का पार्सल लेने बाहर निकले, तभी रूसी निगरानी ड्रोन ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में बास्की की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि व्लासेंको के बाएँ पैर में गहरी चोट आई। इलाके में भारी गोलाबारी और दुर्गम स्थिति के कारण बख्तरबंद गाड़ियाँ वहाँ तक नहीं पहुँच सकती थीं, यहाँ तक कि उन्हें बचाने भेजे गए दो रोबोट भी तबाह हो गए।
ड्रोन के ज़रिए पहुँचती रही मदद
इस दौरान यूक्रेनी सैनिक हर 4-5 दिनों में ड्रोन के ज़रिए व्लासेंको तक खाना, दवाइयाँ और सिगरेट पहुँचाते थे। वे रेडियो के जरिए अपनी टीम से संपर्क में बने रहे और अपनी पत्नी द्वारा भेजी गई किताब पढ़कर अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा। जब पैर का इन्फेक्शन काफी बढ़ गया और रेंगना भी मुश्किल हो गया, तब उन्होंने खुद ही पैर काटने का खौफनाक फैसला लिया।
ड्रोन से उड़ाकर किया गया अनोखा रेस्क्यू
अक्टूबर की शुरुआत में सुरक्षा बलों ने उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए एक बेहद अनोखा रेस्क्यू प्लान बनाया। 4 अक्टूबर को छह रोटर वाले एक विशाल ड्रोन के ज़रिए विंच हुक और हार्नेस भेजकर व्लासेंको को बाँधा गया और फ्रंट लाइन से करीब 15 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया। रेस्क्यू के दौरान रूसी ठिकानों पर लगातार गोलाबारी की गई ताकि ड्रोन पर हमला न हो सके। फिलहाल खार्किव के सैन्य अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। व्लासेंको का कहना है कि अपनी बेटी से दोबारा मिलने की उम्मीद ने ही उन्हें इस नरक जैसी स्थिति में भी ज़िंदा रखा।


